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Roos,Russia Aur Rasputin: Czarshahi Ka Itihas

by Praveen Kumar Jha
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355182838
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 134
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

पृथ्वी के सबसे बड़े भू-भाग की मिल्कियत रूस को कैसे मिली? क्या यह सदियों से एक महाशक्ति थी? क्या यूनानी और रोमन साम्राज्यों के समय रूस का कोई वजूद था ? यह इतिहास-यात्रा हमें साम्यवादी रूस के लाल आवरण के पीछे ले जाती है। वहाँ झाँकनेपर वोल्गा नदी में कहीं दूर से आते जहाज़ी मिलेंगे। बलालइका वाद्य बजाते शिकारी मिलेंगे। वे व्यापारी मिलेंगे जो रेशम मार्ग से गुज़रते किसी सराय में सुस्ता रहे होंगे । वे मंगोल मिलेंगे जो पूरब से पश्चिम तक परचम लहरा रहे होंगे। वे स्लाव जो अपनी नस्ल, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति की कुण्डली मिला रहे होंगे। वे ऑर्थोडॉक्स ईसाई जो अपना नया गढ़ तलाश रहे होंगे। वे ज़ार जिन्होंने नेपोलियन से युद्ध किया। वह तॉलस्तॉय की नताशा का रूमानी नृत्य । वह जारशाही जिसका अन्त विश्व की एक निर्णायक घटना बनी। आख़िर कौन थे रूस ? कैसे बना रशिया ? और कौन था रासपूतिन?★★★साइबेरिया से बाल्टिक सागर तक फैले दुनिया के सबसे बड़े देश का इतिहास । एक ऐसा इतिहास जिसके बिना आज की जियोपॉलिटिक्स समझनी असम्भव है। यह इतिहास वाइकिंग युग से होते हुए चंगेज़ ख़ान और जारशाही के ऐसे दौर से गुज़रता है, जिसमें जिजीविषा है, धर्मयुद्ध है, रक्तपात है, षड्यन्त्र है, रोमांस है, क्रान्ति है । यह एक देश ही नहीं, दुनिया के निर्माण की कथा है। एक ऐसे विचार जन्म की नींव है, जिसने आधुनिक विश्व की तासीर तय की । सामन्तवादी से साम्यवादी रूस के सफ़र का रहस्यमय और रोमांचक इतिहास एक नयी क़लम से नये अन्दाज़ में लिखा गया है | 'कुली लाइन्स' के लेखक प्रवीण कुमार झा की इस नयी पुस्तक की गति आज की तेज़ भागती दुनिया के मद्देनज़र है ।

प्रवीण कुमार झा कथेतर रुचि के लेखक हैं। गिरमिटिया इतिहास पर उनकी शोधपरक पुस्तक 'कुली लाइन्स' चर्चित रही। संगी इतिहास पर आधारित पुस्तक 'वाह उस्ताद' को कलिंग लिटरेचर फ़ेस्टिवल 2021 ने ‘बुक ऑफ़ द ईयर' से सम्मानित किया। उन्होंने इतिहास पुस्तकों के अतिरिक्त लघु यात्रा - संस्मरण भी लिखे हैं और उनके स्तम्भ प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। प्रवीण का जन्म बिहार में हुआ और वह भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों से गुज़रते हुए अमेरिका और यूरोप में रहे । वह सम्प्रति नॉर्वे में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।

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