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Sabhyata Ka Sankat Banam Adivasiyat

by Ghanshyam
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355717085
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 192
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत' पुस्तक कोरोनाकाल के लॉकडाउन के बीच लिखी गई। यह एकांतवास की चेतना और संवेदना से उपजा एक अनुभवजन्य दस्तावेज है, जिसमें मानव इतिहास की असह्य पीड़ा और करोड़ों लोगों की मौत की गुंजलक को समझने की कोशिश है। मानव सभ्यता के इतिहास में यह एक ऐसी परिघटना है, जिसे आनेवाले सैकड़ों वर्षों तक एक काला अध्याय माना जाएगा।पिछले कुछ सौ वर्षों का इतिहास यह बतलाता है कि जब-जब मानव ने प्रकृति को जीतने का दुस्साहस दिखाया है, तब-तब प्रकृति ने मानव को सुधारने के लिए एक सबक सिखाया है। इन्हीं में एक है—कोरोना महामारी, जिसने यह साबित कर दिया है कि विज्ञान और तकनीक की ऊँचाइयाँ अभी भी प्रकृति को जीत पाने में अक्षम हैं और शायद आगे भी रहेंगी। विशेषज्ञों ने यह भी जताया है कि इनसान की प्रतिरोधक क्षमता जितनी दुरुस्त रहेगी, यह महामारी उसके सामने फटक तक नहीं पाएगी। इस अर्थ में देखें तो आदिवासी इलाकों का अनुभव इसे सच साबित करता है। कोरोना काल का अनुभव यह बतलाता है कि अपने देश के अधिकांश आदिवासी इलाके अपेक्षाकृत महानगरों से ज्यादा सुरक्षित रह पाए। इसका बड़ा कारण यह है कि आज भी आदिवासियत इस तरह की महामारियों से इसलिए लडऩे में सक्षम है, क्योंकि उनका रिश्ता प्रकृति के साथ ज्यादा जीवंत और सहज है। इसलिए इस पुस्तक का शीर्षक 'सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत' है।

घनश्याम का जन्म झारखंड के एक आदिवासी बहुल गाँव महुआडाबर (प्रखंडमधुपुर, जिला-देवघर) में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गाँव के ही विद्यालय में हुई। आगे की पढ़ाई एडवर्ड जॉर्ज हाई स्कूल मधुपुर तथा राँची विश्वविद्यालय में हुई। इसी दौरान लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए संपूर्ण क्रांति आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। आंदोलन के दौरान उन्हें 'मीसा' और 'डी.आई.आर.' में नजरबंद कर भागलपुर केंद्रीय कारा तथा भागलपुर कैंप जेल में रखा गया। आपातकाल की समाप्ति के बाद झारखंड के आदिवासी इलाकों में जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता को बचाने के लिए संघर्षरत रहे तथा युवाओं को शिक्षित-प्रशिक्षित करते रहे। बाबा आमटे ने उन्हें 'लोकनायक जयप्रकाश नारायण युवा अवार्ड' से सम्मानित किया। उन्होंने आदिवासियों के बीच काम करते हुए 'इंडिजिनोक्रेसी' (देशज गणतंत्र) नामक चर्चित पुस्तक का लेखन किया। इसका एक आलेख 'पेंग्विन' ने अपनी पुस्तक 'बीइंग आदिवासी' में समायोजित किया। 'सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत' पुस्तक उनका ग्याहरवाँ प्रकाशन है।

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