Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Sahitya Aur Sangeet-1

by Mukesh Garg
Save 35% Save 35%
Current price ₹390.00
Original price ₹600.00
Original price ₹600.00
Original price ₹600.00
(-35%)
₹390.00
Current price ₹390.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350726532
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 377
  • Original Price: INR 600.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 500 grams
  • BISAC Subject(s): General

साहित्य और संगीत-1 - साहित्य और संगीत का आपसी रिश्ता सभी कलाओं में सबसे आत्मीय है। भारत में तो विशेष रूप से। संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश से लेकर अवधी, ब्रज आदि भाषाओं और आज की खड़ी बोली तक जितना साहित्य उपलब्ध है, संगीत उसका किसी न किसी रूप में अभिन्न अंग रहा है। दोनों कलाओं के इस रिश्ते में अनेक कारणों से बदलाव भी आता रहा है। इतिहास इसका गवाह है। साहित्य और संगीत के इन सम्बन्धों के कितने रूप मिलते हैं, कब और कैसे उन्होंने एक-दूसरे को पुष्ट किया या प्रभावित किया, आपसी रिश्ते में कब और क्यों क्षीणता आयी, इत्यादि सवाल गहरे हैं। दोनों कलाओं के आपसी सम्बन्धों के विविध पहलुओं की पड़ताल के लिए अब तक कोशिशें भी कई हुई हैं। इन्हें एकत्र देखने की लम्बे समय से ज़रूरत बनी हुई थी। यह पहला ग्रन्थ है, जिसने इस आवश्यकता की पूर्ति का गम्भीर प्रयास किया है। दोनों कलाओं के अन्तरानुशासनिक अध्ययन को इससे निश्चय ही बल मिलेगा।

मुकेश गर्ग - 8 अक्टूबर, 1950 को हाथरस (उ.प्र.) में जन्मे डॉ. मुकेश गर्ग हिन्दी साहित्य और संगीत दोनों विषयों के जाने-माने विशेषज्ञ हैं। हिन्दी विषय में आगरा विश्वविद्यालय से एम.ए. करने के बाद आपने दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.लिट्. और पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। संगीत (वॉयलिन) विषय में भी आपने एम.ए. की डिग्री मेरठ विश्वविद्यालय से हासिल की है। विश्वविख्यात वॉयलिन वादिका पद्मभूषण प्रोफ़ेसर (श्रीमती) एन.राजम् के शिष्यत्व का आपको सौभाग्य प्राप्त है।'संगीत' नामक प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका के आप 1974 से 2011 तक सम्पादक रहे और 2011 से इसके परामर्शदाता हैं। 1980 और 90 के दशकों में 'दिनमान' और 'नवभारत टाइम्स' में नियमित रूप से छपने वाली संगीत की अपनी गहरी समीक्षाओं से डॉ. मुकेश गर्ग ने देश भर में अपनी ख़ास पहचान बनायी है।आई.सी.सी.आर. (भारत सरकार) द्वारा हिन्दी चेयर की स्थापना के लिए आपको अजरबैजान भेजा गया। वहाँ आपने प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में 'Azerbaijan University of Languages, Baku' में 2010 से 2012 तक शिक्षण कार्य किया।'संगीत संकल्प' नामक अखिल भारतीय संस्था की आपने 1989 में स्थापना की। तभी से आप इसके मानद राष्ट्रीय महानिदेशक हैं। अनेक टी.वी. सीरियलों और फ़िल्मों में आपने संगीत-निर्देशन भी किया है।देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा आपको अनेक सम्मानों से अलंकृत किया जाता रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में आप 1972 से निरन्तर पढ़ा रहे हैं।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us