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Sahitya Aur Yatharth

by Haward Fast
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350720592
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 96
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

साहित्य और यथार्थ - यह पुस्तक 'साहित्य और यथार्थ' एक लम्बा निबन्ध है जिसमें लेखक ने तत्कालीन अमरीकी साहित्यिक माहौल का जायजा लेते हुए यथार्थ सम्बन्धी समस्याओं को उठाया है। इस पुस्तक को पढ़ते हुए पाठकों को सहज ही अनुभव होगा कि उनकी शैली वैसी आलोचनापरक नहीं है जैसी अक्सर आलोचनात्मक पुस्तकों की होती है। इसमें आवेश है, उग्रता है, तेजी है। लेकिन जिस माहौल में समाजवादी विचारों के ख़िलाफ़ जबरदस्त मुहिम चली हो; जहाँ व्यवस्था का शिकंजा सम्पूर्ण संस्कृति को ही नष्ट करने पर तुला हो; जहाँ लोगों के विश्वासों के नीचे की ज़मीन लगातार खिसकती जा रही हो; जहाँ कल के मित्र आज शत्रु पक्ष में हथियार संभाले आपको मारने पर आमादा हों; जहाँ रुग्णता, गुंडागर्दी, फूहड़ता का बोलबाला हो-इस माहौल में हावर्ड फास्ट की बेचैनी और तल्ख़ी को समझा जा सकता है। यह बहुत सम्भव है कि उनसे कुछ ज़्यादती भी हुई हो।

हावर्ड फास्ट - हावर्ड फास्ट का जन्म 11 नवम्बर, 1914 को न्यूयार्क शहर में एक मज़दूर परिवार में हुआ था। उनके पिता एक मामूली मज़दूर थे और स्वयं फास्ट ने अपने जीवन के बारे में लिखते हुए बताया है कि वे अधिकांश समय या तो हड़ताल पर रहते थे या बेरोज़गार। उनका बचपन भयानक ग़रीबी और भुखमरी में बीता। यही कारण था कि 11 वर्ष की आयु में ही उन्होंने मज़दूरी करना शुरू की और किसी तरह अपने परिवार को भूखों मरने से बचाया। काम करते हुए ही 16 वर्ष की आयु में ही उन्होंने लिखना शुरू किया। नौकरी के लिए उन्हें शहर-दर-शहर भटकना पड़ा। ऐसी ज़िन्दगी बिताते हुए शिक्षा प्राप्त करना और लेखक बन जाना कितना कठिन कार्य है, इसका अन्दाज़ सहज ही लगाया जा सकता है। अपने जीवन के इन कटु अनुभवों से गुज़रते हुए ही फास्ट कम्युनिस्ट बने। इन व्यापक जीवनानुभावों और मार्क्सवादी विचारधारा से लैस होकर जो रचनाएँ उन्होंने विश्व साहित्य को दी हैं वे कालजयी हैं। वे सच्चे अर्थों में सर्वहारा लेखक हैं।

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