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Sahitya Shrasta Nirala

by Rajkumar Saini
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170554233
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 220
  • Original Price: INR 595.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

निराला की सम्पूर्ण साहित्य साधना कोरी किताबी उठापटक नहीं है। मेहनतकश जनता के सुख-दुखों, संघर्षों, आकांक्षाओं और स्वप्नों से वह अपना गहरा ताल्लुख रखती है। उनके काव्य में दलित, उपेक्षित, पीड़ित और शोषित जनों के हृदयों से रह-रहकर फूट पड़ने वाले राग-रागनियाँ हैं। संघर्षरत मनुष्यता और यातनाग्रस्त मानवता के आशा, उल्लास, निराशा और संत्रास भरे स्वप्न हैं। वही वह केन्द्रीय दृष्टि है जिसके आधार पर लेखक ने निराला के साहित्य-सर्जक व्यक्तित्व का विवेचन किया है। निराला साहित्य को प्रगतिशील दृष्टि से देखने वाली यह एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है।

राजकुमार सैनी -जन्म : 7 सितम्बर, 1942 को तिमारपुर, दिल्ली । शिक्षा : दिल्ली, विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी) और एलएल.बी. । तत्पश्चात इसी विश्वविद्यालय से अनुवाद पाठ्यक्रम में एक वर्ष तक सफलतापूर्वक प्रशिक्षण। प्रयाग से साहित्यरत्न ।विविध पत्र-पत्रिकाओं में पाँच सौ से अधिक रचनाएँ (लेख-आलेख, कविताएँ, कहानियाँ, उपन्यास-अंश, टिप्पणियाँ, समीक्षाएँ आदि) प्रकाशित तथा महत्त्वपूर्ण चयनिकाओं में रचनाएँ संकलित ।कृतियाँ : लेख-आलेख, सौन्दर्य और यथार्थ, भाषा, अनुवाद और साहित्य, साहित्य स्रष्टा निराला, समसामयिक साहित्य (आलोचना); रोशनी और खुशबू, प्रहार स्याह रात पर, नरम नरम धूप, घाटी से शिखर तक (काव्य); समर्पण, बदलाव, पड़ोसन (कहानी-संग्रह); अर्द्ध कथानक प्रभा, आशुतोष, दीवार में तरेड़, खिड़की से झाँकता है कौन (उपन्यास) ।सम्मान और पुरस्कार : हिन्दी अकादमी, दिल्ली से 'दीवार में तरेड़' उपन्यास पर ' कृति पुरस्कार' । भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 1990 में डॉ. अम्बेडकर फेलोशिप से सम्मानित । श्री सांई दास बालूजा कला अकादमी, नयी दिल्ली से साहित्य और राष्ट्रभाषा की उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रशस्ति पत्र । वर्ष 1995 में 'दिनकर हिन्दी संस्थान', बेगुसराय, बिहार द्वारा साहित्य में विशिष्ट सेवा के लिए 'साहित्य महोपाध्याय' की उपाधि से अलंकृत। वर्ष 2000 में 'विक्रम शिला विद्यापीठ', गांधीनगर, गुजरात द्वारा सुदीर्घ हिन्दी सेवा, सारस्वत साधना तथा कला के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों के लिए 'विद्या वाचस्पति' की उपाधि प्रदान की गयी। वर्ष 2003-04 के लिए 'संसदीय हिन्दी परिषद' नयी दिल्ली द्वारा 'राष्ट्र भाषा गौरव सम्मान' प्रदान किया गया।केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद, नयी दिल्ली द्वारा राजभाषा की सेवा के लिए सम्मानित ।'संसदीय राजभाषा समिति' में कई वर्षों तक उच्च पदों पर कार्यरत रहकर देश में राजभाषा के प्रगामी प्रयोग की प्रगति का निरीक्षण किया। गृह मन्त्रालय, भारत सरकार के निदेशक के रूप में चार वर्षों तक भाषा सम्बन्धी अनुसन्धान कार्य किया तथा 'राजभाषा भारती' और 'राजभाषा पुष्पमाला' का सम्पादन किया।निदेशक, केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो, राजभाषा विभाग, गृह मन्त्रालय, भारत सरकार के पद से सेवानिवृत्त ।

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