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Samay Shila Par...

by Namita Singh
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789357753241
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 140
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): Memoirs

इतिहास बनता समय केवल बीते ज़माने का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि वर्तमान को समझने में मदद भी करता है। व्यक्ति तो केवल चरित्र है, माध्यम है समय को समझने के लिए। इतिहास में व्यक्ति की भूमिका महत्त्वपूर्ण होते हुए भी सीमित होती है। समाज और संस्कृति का फलक व्यापक है। समय की अविरल धारा में रास्ता बनाते शिलाखण्ड और उन पर अंकित होते पदचिह्न इतिहास भी हैं और वर्तमान की पहचान भी ।यहाँ विरासत में उत्तराखण्ड के अंचल में बसा कौसानी है तो सफ़र की शुरुआत लखनऊ से होती है और ठहराव होता है अलीगढ़ में। लोगों के बीच काम करते हुए नित नये अनुभव, क्योंकि जो घर-बाहर समाज में हो रहा है, वह अक्सर ऊपर से दिखाई नहीं देता...और जो दिखता है, वह वास्तव में वैसा होता नहीं । दरअसल सत्ता और राजनीति का चोली-दामन का साथ रहा है। सामाजिक परिवर्तन की स्थिति एकाएक नहीं होती। कभी-कभी अनेक अन्तर्धाराएँ मुख्यधारा से अधिक प्रभावी हो जाती हैं जो साधारण स्थितियों में पहचानी नहीं जातीं।इन संस्मरणों में अपने समय की शिनाख़्त और समय को पढ़ने की कोशिश है... ताकि सनद रहे ।

नमिता सिंह -जन्म : लखनऊशिक्षा : एम.एससी., पीएच.डी. ।टीकाराम गर्ल्स डिग्री कॉलेज, अलीगढ़ में लगभग 40 वर्ष अध्यापन। रसायन शास्त्र की विभागाध्यक्ष और प्राचार्या पद सँभालने के बाद 2005 में सेवानिवृत्त ।कृतियाँ : खुले आकाश के नीचे, राजा का चौक, नीलगाय की आँखें, जंगलगाथा, निकम्मा लड़का, मिशन जंगल और गिनीपिग, उत्सव के रंग (कहानी-संग्रह); कर्फ्यू तथा अन्य कहानियाँ (चयनित कहानियाँ); अपनी सलीबें, लेडीज़ क्लब (उपन्यास); दिव्या : इतिहास, संस्कृति और स्त्री-विमर्श, 1857 और जन-प्रतिरोध (सम्पादित); कृति और कृतिकार (समीक्षा-आलोचना); स्त्री-प्रश्न (स्त्री-विमर्श); हाँ, मैंने कहा! (साक्षात्कार-संग्रह)। नमिता सिंह की कहानियाँ : फ़सादात की लायानियत (उर्दू में कहानी-संग्रह)-अनु. : डॉ. सीमा सगीर । डॉ. नमिता सिंह का कथा साहित्य-डॉ. शमा परवीन। नमिता सिंह और उनका रचना-संसार-डॉ. सुरुचि मिश्रा । नमिता सिंह का कथा साहित्य और पितृसत्तात्मक समाज का स्वरूप-डॉ. मनीषा जैन ।सम्पादन : 'वर्तमान साहित्य' साहित्यिक पत्रिका, 2004 से 2014 तक । अनेक सामाजिक संगठनों में सक्रिय भागीदारी । राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जनवादी लेखक संघ । अध्यक्ष, के.पी. सिंह मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट ।सम्पर्क : डी-1, सेक्टर 50, नोयडा-201301मो. : 9412272762

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