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Sarjak Man Ka Path

by Selection & Preface: Nand Kishore Acharya
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789369440771
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 278
  • Original Price: INR 695.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 450 grams
  • BISAC Subject(s): Letters

‘सर्जक मन का पाठ’ प्रसिद्ध कथाकार गोविन्द मिश्र को तीन पीढ़ियों के कुछ प्रमुख लेखकों द्वारा लिखे गये पत्रों का संग्रह है, जिनका वैशिष्ट्य इस बात में है कि उनमें पत्र-लेखकों अथवा गोविन्द मिश्र के निजी जीवन, समस्याओं तथा राग-विराग की चर्चा अत्यन्त न्यून है। अधिकांशतः वे गोविन्द मिश्र की कृतियों पर ही केन्द्रित हैं। जहाँ कुछ व्यक्तिगत चर्चा है भी, उसका सम्बन्ध लेखकों की अपनी सर्जनात्मक समस्याओं से ही अधिक है।इन पत्रों को पढ़ने के दौरान पाठक में गोविन्द मिश्र की रचनाओं को ही नहीं, किसी भी साहित्यिक कृति को समझने की अन्तर्दृष्टि विकसित होने लगती है। साथ ही, इस बात की ओर भी ध्यान आकर्षित होता है कि एक रचनाकार दूसरे रचनाकार की कृति में क्या तलाश करना चाहता है और इस तलाश में वह किन सर्जनात्मक प्रतिमानों को निरूपित करता है। किसी के लिए वह 'अपूर्वानुमेयता' है तो किसी के लिए ‘घटना के यथार्थ से उसके आशय में उतरना', तो किसी अन्य के लिए संरचनात्मक अन्विति। इसीलिए, इन पत्रों में कभी-कभी एक ही कृति को लेकर इन पत्र-लेखकों में मत-वैभिन्न्य भी साफ़ झलकता है। ये पत्र यह भी बताते हैं कि भरपूर आत्मीयता और पूर्ण सम्मान के साथ अपनी असहमति भी कैसे व्यक्त की जा सकती है। ‘अहो रूपम अहो ध्वनि' के वातावरण में पत्र-लेखकों की स्पष्टोक्तियाँ अलग से ध्यान खींचती हैं।यह पत्र-संग्रह पाठकों और साहित्य-अध्येताओं के लिए इसलिए भी एक अपरिहार्य पाठ हो जाता है कि इससे गोविन्द मिश्र के कृतित्व को समझने-परखने के सूत्रों के साथ सर्जक मन से जुड़े सवालों और प्रतिमानों पर गहरी विचारणा मिलती है, जिससे कृति-विश्लेषण की ऐसी प्रक्रिया उजागर होती है, जो आलोचना को भी वास्तविक अर्थ में रचनात्मक आत्मा दे सकती है।

नन्दकिशोर आचार्य31 अगस्त, 1945 को बीकानेर में जन्मे नन्दकिशोर आचार्य को विविध विधाओं में अपनी सृजनात्मकता के लिए केन्द्रीय साहित्य अकादमी, केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी, ‘महात्मा गांधी सम्मान’, ‘सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार', राजस्थान साहित्य अकादमी के 'सर्वोच्च मीरा पुरस्कार', राजस्थान संगीत नाटक अकादमी तथा 'बिहारी पुरस्कार' के अतिरिक्त अन्य कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से अलंकृत किया गया है। महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में अतिथि लेखक तथा आईआईआईटी, हैदराबाद में प्रोफ़ेसर ऑफ़ एमिनेंस रहे आचार्य ने प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर में अहिंसा - शान्ति ग्रन्थमाला का सम्पादन किया है। आजकल वह आईटीएम, ग्वालियर में एमेरिटस प्रोफ़ेसर के रूप में जुड़े हैं।अज्ञेय द्वारा सम्पादित चौथा सप्तक के कवि नन्दकिशोर आचार्य के अब तक बाईस कविता-संग्रह, आठ नाटक, ग्यारह साहित्यिक आलोचना की पुस्तकों के अलावा अहिंसा-दर्शन, गांधी विचार, मानवाधिकार, शिक्षा संस्कृति-विचार आदि पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।अज्ञेय, निर्मल वर्मा, विनोबा की संचयिताओं, अनेक उर्दू कवियों के संचयनों, गोविन्द मिश्र रचनावली, नेमिचन्द्र जैन रचनावली के सम्पादन के अतिरिक्त आचार्य ने अहिंसा विश्वकोश का सम्पादन भी किया है। उन्होंने रियोकोन, ब्रॉडस्की, लोर्का, उंगारेती, अर्नाल्ड वेस्कर आदि की साहित्यिक रचनाओं के अतिरिक्त एम. एन. राय, हिरियन्ना, बट्रेंड रसेल, डॉ. दयाकृष्ण आदि के वैचारिक लेखन, महात्मा गांधी पर जोसेफ डोक, मुरिएल लेस्टर और बी.के. मल्लिक की पुस्तकों और अज्ञेय की अंग्रेज़ी कविताओं का भी हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया है। अनेक राष्ट्रीय अन्तरराष्ट्रीय आयोजनों में रचना-पाठ एवं व्याख्यानों के लिए आमन्त्रित आचार्य इंग्लैंड, चीन, बेल्जियम, दक्षिण अफ़्रीका, नेपाल एवं इंडोनेशिया की साहित्यिक-शैक्षणिक यात्राएँ कर चुके हैं।

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