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Shailesh Matiyani Ki Lokpriya Kahaniyan

by Shailesh Matiyani
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Book cover type: PaperBack
  • ISBN13: 9789390900954
  • Binding: PaperBack
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 176
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

शैलेश मटियानी हिंदी के उन गिने-चुने कथाकारों में से एक हैं, जो रचना को जिंदगी से इस तरह उठा लेते हैं कि अनुभव और कल्पना एकमेक होकर एक विशेष प्रकार की दुनिया ही रचने लगते हैं। मटियानीजी का अपनी कहानी के जरिए जिंदगी को देखने का नजरिया अलग ही है। वे अपनी हर कहानी में जैसे एक नई बात खोज लाना चाहते हैं। उनके विपुल लेखन संसार में से चयनित प्रस्तुत लोकप्रिय कहानियाँ अपने-अपने कारणों तथा कथ्य की विविधता से आकर्षक हैं। इन कहानियों में वर्णित चरित्र, स्थितियाँ, परिवेश और वातावरण ऐसा है कि पाठक लंबे समय तक उनके प्रभाव में रहता है। उनकी भाषा, कहन, शिल्प और कथा की प्रस्तुति अनायास ऐसा चमत्कार पैदा करती है कि पढ़नेवाला उसी कथादेश का नागरिक हो जाता है। इतना ही नहीं, कहानी पाठक केहृदय में उतरती चली जाती हैं।

शैलेश मटियानीजन्म ः 14 अक्तूबर, 1931 को अल्मोड़ा जनपद के बाड़ेछीना गाँव में।शिक्षा ः हाई स्कूल तक।शैलेश मटियानी का अभिव्यक्ति-क्षेत्र बहुत विशाल है। वे प्रबुद्ध हैं, अतः लोक चेतना के अप्रतिम शिल्पी हैं। श्रेष्ठ कथाकार के रूप में तो उन्होंने ख्याति अर्जित की ही, निबंध और संस्मरण की विधा में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।कृतित्व ः तीस कहानी-संग्रह, इकतीस उपन्यास तथा नौ अपूर्ण उपन्यास, तीन संस्मरण पुस्तकें, निबंधात्मक एवं वैचारिक विषयों पर बारह पुस्तकें, लोककथा साहित्य पर दस पुस्तकें, बाल साहित्य की पंद्रह पुस्तकें। ‘विकल्प’ एवं ‘जनपक्ष’ पत्रिकाओं का संपादन।पुरस्कार एवं सम्मान ः प्रथम उपन्यास ‘बोरीवली से बोरीबंदर तक’ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत; ‘महाभोज’ कहानी पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का ‘प्रेमचंद पुरस्कार’; सन् 1977 में उत्तर प्रदेश शासन की ओर से पुरस्कृत; 1983 में ‘फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ पुरस्कार’ (बिहार); उत्तर प्रदेश सरकार का ‘संस्थागत सम्मान’; देवरिया केडिया संस्थान द्वारा ‘साधना सम्मान’; 1994 में कुमायूँ विश्वविद्यालय द्वारा ‘डी.लिट.’ की मानद उपाधि; 1999 में उ.प्र. हिंदी संस्थान द्वारा ‘लोहिया सम्मान’; 2000 में केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा ‘राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार’।

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