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Sharbat

by Zehra Nigah , Kamal Naseem
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789347043376
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 190
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

लकी राजीव की कहानियाँ अपनी ताजगी और कहन के तरीकों की वजह से बहुत प्रभावित करती हैं। ये अपनी आन्तरिकता में सघन, मानवीय और सरल हैं। इनके केन्द्र में आज की जटिल, ठंडी और स्पन्दनहीन होती दुनिया के बरक्स उलझे रिश्तों को सुलझाने की पड़ताल है, मनुष्य की अच्छाई है तो उसकी चालाकियाँ भी हैं और उनसे निरन्तर जूझता तन और मन है। किताब की पहली ही कहानी ‘विसर्जन’ में प्रवेश करने पर ‘विलम्बित खयाल गायकी’ का एहसास होने लगता है। यह कहानी मनुष्य के भीतर के रहस्यों को अनावृत करती है। क्रूरता, हिंसा के पीछे की कहानियों में ऐसी निर्मिति की प्रवृत्तियों के निशान मिलते हैं जिनको लेखक बहुत हुनर से उद्घाटित करती हैं। एक मनोचिकित्सक की तरह वे पहले आपको धीरज धराती हैं, फिर उपचार करती हैं। उनकी लगभग सभी कहानियों में इसकी खूबसूरत और सफल बानगी मिलती है। मनुष्य की सबसे उत्कृष्ट सम्पत्ति, प्रेम का दर्शन होता है कहानी ‘ना-रसीदा’ और ‘तलघर’ में, जहाँ लकी की सूक्ष्म दृष्टि देर तक ठहरती है और प्रेम की उदात्तता को तलाशती है। क्या प्रेम भी आज की आपाधापी, ऐप्स की कलाबाजियों और फौरी थ्रिल के उन्माद में कहीं ज़मींदोज़ हो रहा है? इन सबका जवाब लकी के यहाँ मौजूद है क्योंकि उनके यहाँ स्त्री और पुरुष दोनों समान तरीकों से हीरो और नॉन-हीरो होते हैं। उनकी इस सम्यक आधारशिला पर उनके किरदार कभी बांग्ला बोलते हैं तो कभी मराठी। कभी वे पूर्वांचल में स्त्री-पुरुष का शताब्दियों पुराना खेल खेल रहे हैं तो कभी वे मध्यप्रदेश की किसी बेनाम-सी बस्ती में जीवन, समाज, संघर्ष और आधुनिकता के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रयास कर रहे हैं।

सम्पन्न अनुभूतियों से उपजा दिल को छू लेनेवाला ज़रूरी कहानी-संग्रह।

—वन्दना राग

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