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Sonam

by Yese Darje Thongachhi
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788181439765
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 248
  • Original Price: INR 175.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): Comics & Graphic Novels

सोनाम - साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित और अरुणाचल प्रदेश के शेरदुकपेन कबीले से सम्बद्ध साहित्यकार येसे दरजे थोंगछी बहुभाषाविद हैं– हिन्दी, अंग्रेज़ी, नेपाली, बंगाली, असमिया और अरुणाचली में निष्णात, लेकिन उन्होंने अभिव्यक्ति के लिए असमिया भाषा का ही चुनाव किया। श्री थोंगछी ज्योतिप्रसाद अग्रवाल और लम्मर दाई जैसे उन साहित्यकारों की परम्परा में आते हैं जिन्होंने ग़ैर असमिया भाषी होते हुए भी असमिया के साहित्यिक जगत में प्रचुर ख्याति अर्जित की है। उनका बहुचर्चित उपन्यास 'सोनाम' भूटान के साकतेंग-मिरोक इलाकों में तथा अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग और तवाँग इलाकों में बसने वाले छोटे-से पशुपालक ब्रोकपा कबीले का अनूठा चित्रण करता है। उपन्यास की थीम याक चराने वाले समुदाय के सांस्कृतिक-सामाजिक परिवेश का के मार्मिक लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है और इस समाज में प्रचलित बहुपतित्व की प्रथा के इर्द-गिर्द घूमती है।नायिका सोनाम और उसके दो पतियों-लबजाँग और पेमा वांगछू के इस त्रिकोण की जटिलता को उपन्यासकार येसे दरजे थोंगछी ने बड़ी कलात्मकता के साथ चित्रित किया है और दो पुरुषों से भावनात्मक स्तर पर जुड़ी एक युवती के अन्तर्द्वन्द्व को सधे हाथों के साथ उकेरा है।इस अत्यन्त सशक्त कलाकृति पर वर्ष 2005 में एक सफल फ़िल्म बनी है और राष्ट्रपति के रजत कमल पुरस्कार से सम्मानित होने के साथ अनेक अन्तर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में सराही गयी है - अपनी शक्तिशाली कथावस्तु और परिवेश के कारण।आवरण चित्र उपन्यास पर बनी फ़िल्म की अभिनेत्री- ताशी ल्हामू -एक भावपूर्ण मुद्रा में।

येसे दरजे थोंगछी - जन्म : 26 मई, 1951।शिक्षा : असमिया में एम.ए.।अनुभव : भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत।5 ज़िलों में 13 वर्ष ज़िलाधिकारी रहने का अनुभव। वर्तमान अरुणाचल प्रदेश सरकार में परिवहन, सांस्कृतिक परिक्रमा, आदि विभागों में आयुक्त, सचिव पद में कार्यरत।पुरस्कार असम साहित्य सभा पुरस्कार, भारत सरकार का भाषा भारती पुरस्कार तथा अन्य कई पुरस्कार। उपन्यास 'मौन होंट मुखर हृदय' के लिए 2005 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित।कृतियाँ : सोनाम, मौन होंट मुखर हृदय, शव कटा मानुह, बिष कन्यार देशत आदि सात उपन्यास पापर पुखुरि, बाँह फुलर गोन्ध, आदि कहानी संग्रह, एक लोक गाठा तथा कई अप्रकाशित नाटक तथा निबन्ध|महेन्द्र नाथ दुबे - अनेक मौलिक, सम्पादित और अनूदित कृतियों के रचयिता श्री महेन्द्र नाथ दुबे ने आगरा विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. करने के बाद बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने न केवल 'सूरसागर' जैसे प्रख्यात ग्रन्थ का पाठ वैज्ञानिक सम्पादन किया है बल्कि असमिया और बांग्ला की महत्वपूर्ण कृतियों से हिन्दी पाठकों को परिचित भी कराया है। वे के.एम. मुंशी हिन्दी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ, आगरा के अध्यक्ष एवं निदेशक भी रहे हैं। मूलतः उत्तर प्रदेश के रहने वाले श्री दुबे असम में निवास करने के बाद इन दिनों आगरा में रहते हैं।

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