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Sone Ki Chirhiya Indian History Book In Hindi

by Shree Anish , Shri Arun Anand
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789355621214
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 96
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

भारत के अधिकांश नागरिक आज भी अपने सुनहरे इतिहास को नहीं जानते। एक ऐसा समय था, जब पूरे विश्व ने हमें 'सोने की चिड़िया' के नाम से जाना। हम सभी को, खासकर हमारी युवा पीढ़ी को यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि वे क्या गुण थे, क्या परंपराएँ थीं, जिन्होंने हमें इतिहास में विश्वगुरु बनाया; और वे क्या गलतियाँ थीं, ऐसे क्या कारण व क्या परिस्थितियाँ थीं कि विदेशी शक्तियाँ हमें इतने लंबे समय तक अपना गुलाम बनाने में सफल हुईं।इन्हीं सब विषयों पर सरल, सहज भाषा में विभिन्न जगहों पर बिखरी जानकारी को एक सूत्र में पिरोने वाली यह पुस्तक सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए रोचक व तथ्यात्मक जानकारियाँ उपलब्ध करवाती है। साथ ही यह पुस्तक हमें बताती है कि किस प्रकार ब्रिटिश राज के दौरान योजनाबद्ध ढंग से भारतीय सभ्यता के समूल नाश के ऐसे प्रयास किए गए, जिनके दुष्प्रभाव हम आज भी झेल रहे हैं। दोबारा सोने की चिड़िया बनने के लिए हमें इस इतिहास को जानना होगा, ताकि पहले प्राप्त की गई उपलब्धियों को हम पुनः स्थापित करें और पूर्व में की गई गलतियों को न दोहराएँ। हमारी गलतियों और उपलब्धियों का समसामयिक संदर्भों में एक ऐसा दस्तावेज, जिसे हर किसी को पढ़ना चाहिए।

श्री अनीशभारतीय कॉरपोरेट जगत् में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैसे वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं। सन् 2006 में 'पीपल स्ट्रॉन्ग' नामक कंपनी की स्थापना करने के बाद वे आध्यात्मिक यात्रा के लिए हिमालय चले गए। एक दशक से अधिक समय तक गहन साधना करने के उपरांत सन् 2017 में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में पुनः प्रवेश किया। कुछ विशिष्ट कार्यक्रमों तथा विमर्श के माध्यम से सामाजिक, व्यावसायिक, कॉरपोरेट और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आध्यात्मिक जागृति लाने का प्रयास कर रहे हैं। युवाओं और भविष्य के नेताओं में जीवन-मूल्य आधारित स्पष्टता लाना उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र है। वे एक प्रबुद्ध लेखक, वक्ता व आध्यात्मिक गुरु हैं। धर्मशाला स्थित 'साधो संघ फाउंडेशन' के माध्यम से वे 'आत्मबोध' सहित कई अन्य कार्यक्रमों के सूत्रधार हैं। उनकी पहली पुस्तक 'लेट द मड सेटल' थी। 'सोने की चिड़िया' उनकी दूसरी पुस्तक है।अरुण आनंदतीन दशक से पत्रकारिता व लेखन में सक्रिय हैं। राम जन्मभूमि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, इसलामी कट्टरवाद तथा भारतीय इतिहास से संबंधित विषयों पर उन्होंने एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है। उनका एक्स हैंडल @ArunAnandLive है।

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