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Sundarakanda

by Goswami Tulsidas
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355210845
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 144
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): Hinduism / General

संवत्‌ 1631 में तुलसीदासजी ने श्रीरामचरितमानस की रचना प्रारंभ की। दो वर्ष, सात महीने और छब्बीस दिन में यह अद्भुत ग्रंथ संपन्न हुआ। सुंदरकांड मूलतः गोस्वामी तुलसीदास कृत इसी श्रीरामचरित मानस का एक भाग है। सुंदरकांड में हनुमानजी द्वारा किए गए महान्‌ कार्यों का वर्णन है। मानस पाठ में सुंदरकांड के पाठ का विशेष महत्त्व माना जाता है। सुंदरकांड में हनुमान का लंका प्रस्थान, लंका दहन कर लंका से वापसी तक के घटनाक्रम आते हैं। साथ ही उनकी असीम शक्ति, बुद्धि-कौशल और अनन्य भक्ति का पता चलता है। सुंदरकांड का पारायण वाले साधक को असीम ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त होती है।

गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सोरों शूकरक्षेत्र, वर्तमान में कासगंज (एटा) उत्तर प्रदेश में माना जाता है। उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। अति सुंदर भारद्वाज गोत्र की कन्या रत्नावली के साथ उनका विवाह हुआ। पत्नी द्वारा फटकारे जाने पर उन्होंने काशी में विद्याध्ययन किया और विद्दान्‌ बने। चित्रकूट पर उन्हें भगवान्‌ राम के दर्शन हुए। अपने 126 वर्ष के दीर्घ जीवन-काल में तुलसीदासजी ने कालक्रमानुसार निम्नलिखित कालजयी ग्रंथों की रचनाएँ की-गीतावली (1571), कृष्ण-गीतावली (1571), रामचरितमानस (1574), पार्वती-मंगल (1582), विनय-पत्रिका (1582), जानकी-मंगल (1582), रामललानहछू (1583), वैराग्यसंदीपनी (1612), रामाज्ञाप्रश्न (1612), सतसई, बरवे रामायण (1612), कवितावली (1612), हनुमान बाहुक इत्यादि।

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