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Surya Ka Aamantaran

by Makrand Dave
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350484890
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 168
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): Yoga

सालेह आमरी नामक संत बार-बार कहते रहते थे कि जब कोई दरवाजा खटखटाता रहता है तो कभी-न-कभी वह खुल ही जाता है। सूफी संत राबिया के सामने भी जब उन्होंने अपना यह वाक्य दोहराया तब उन्होंने प्रतिप्रश्न किया, पहले यह तो बताइए कि दरवाजा बंद कब था कि अब खुलेगा?---सियाहपोश से किसी ने पूछा कि आप मुद्दे की बात क्यों नहीं कहते? हम अपनी प्रगति कर सकें, ऐसी दलीलें और सबूत हमें क्यों नहीं सिखाते?सियाहपोश ने जवाब दिया। आटा, चीनी, घी और अग्नि आदि जब अलग-अलग रहते हैं, तब ठीक है; पर जब वे साथ मिल जाते हैं तो थोड़े ही समय में उसका स्वादिष्ट हलुआ बन जाता है।—इसी पुस्तक से-गुजराती के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री मकरंद दवे द्वारा विचरित जीवन की व्यावहारिक बातों के इस संग्रह ‘सूर्य का आमंत्रण’ आपके मन-मस्तिष्क का कोना-कोना आनंद से, उत्साह से, संवेदनाओं की ऊँचाइयों से आलोकित कर देगा। यह ‘सूर्य का आमंत्रण’ मानो संन्यासी को, साधक को, गृहस्थ को, विद्यार्थी को, सामाजिक कार्यकर्ता को, यानी सभी को अपना-अपना पाथेय देनेवाला द्रौपदी का अक्षयपात्र है।सूर्य का यह आमंत्रण अधिकाधिक पाठक स्वीकार करें तथा अपने मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक भावविश्व के कोने-कोने को आलोकित करें, इसी में इस पुस्तक के प्रकाशन की सार्थकता है।

मकरंद दवेजन्म : 13 नवंबर, 1922 को गोंडल, सौराष्‍ट्र, गुजरात में।बहुत कम उम्र में ही साहित्य-जगत् का ज्ञान, प्राचीन क्लासिक्स, पुराण, कला, विभिन्न संस्कृतियों और धार्मिक संप्रदायों का ज्ञान प्राप्‍त कर लिया था। 1985 में वलसाड के आदिवासी क्षेत्र में सेवा और साधना के लिए अपनी पत्‍नी ईशा-कुंदनिका के साथ नंदीग्राम नामक कम्यून की स्थापना की। श्री दवे गुजराती के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार होने के साथ-साथ, आध्यात्मिक शिक्षा में भी उतने ही दक्ष थे। अधिकांश कविताएँ तीन खंडों की शृंखला ‘कोई घटमा गहके घेरु’ नाम से प्रकाशित। विभिन्न साधनाओं के सूक्ष्म विवरणों पर कई पुस्तकें; इतना ही नहीं, भारतीय शास्त्रों की नई और अनूठी व्याख्या। उनकी रचित ‘विष्णु सहस्रनाम’ सौंदर्य और आध्यात्मिक महत्ता का मार्गदर्शन करती एक अनूठी रचना है। महात्मा गांधी के परम शिष्य स्वामी आनंद उन्हें ‘साईं’ कहकर बुलाते थे।सौ. मंजरी सुनील बेलापुरकरशास्त्रीय संगीत में अनुस्नातक। मराठी, हिंदी और गुजरात के प्रसिद्ध गरबा गायन के अनेक कार्यक्रम दिए। साहित्य में विशेष अभिरुचि, अनुवाद का यह पहला प्रयास।

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