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Thaharti Sanson Ke Sirhane Se : Jab Zindagi Mauj Le Rahi Thi

by Ananya Mukherjee , Urmila Gupta , Mridul Bhasin, Ed. Prabhat Ranjan
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789388933704
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Sarthak (An imprint of Rajkamal Prakashan)
  • Publisher Imprint: Sarthak (An imprint of Rajkamal Prakashan)
  • Publication Date:
  • Pages: 104
  • Original Price: INR 125.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 120 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

अनन्या मुखर्जी के शब्दों में कहें तो ‘जब मुझे पता चला कि मुझे ब्रेस्ट कैंसर है, मैं विश्वास नहीं कर सकी। इस ख़बर ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया। लेकिन जल्द ही मैंने अपने आत्मविश्वास को समेटकर अपने को मज़बूत किया। मैं जानती थी कि सब कुछ ठीक हो जाएगा...!’

लेकिन पहली बार हुआ कि वो भविष्य के अँधेरों से जीत नहीं पाई।

18 नवम्बर, 2018 को अनन्या कैंसर से अपनी लड़ाई हार गईं। लेकिन अनन्या जीवित हैं, दोस्तों-परिवार की उन ख़ूबसूरत यादों में जिन्‍हें वे उनके लिए छोड़ गई हैं। साथ ही, डायरी के उन पन्नों में जो कैंसर की लड़ाई में उनके साथी रहे।

यह किताब कैंसर की अँधेरी लड़ाई में एक रोशनी की तरह है (कमरे की खिड़की पर बैठे गंदे कौवे की तुलना अपने एकदम साफ़, बिना बालों के सर से करना), एक कैंसर के मरीज़ के लिए कौन सा गिफ़्ट उपयोगी है ऐसी सलाह देना (जैसे रसदार मछली भात के साथ कुछ उतनी ही स्वादिष्ट कहानियाँ एक अच्छा उपहार हो सकती हैं), साथ ही एक कैंसर मरीज़ का मन कितनी दूर तक भटकता है (जैसलमेर रोड ट्रिप और गंडोला–एक तरह के पारम्‍परिक नाव–में बैठ इटली के ख़ूबसूरत, पानी में तैरते हुए, शहर वेनिस की सैर)।

‘ठहरती साँसों के सिरहाने से’ किताब उम्मीद है, हिम्मत है। यह किताब सुबह की चमकती, गुनगुनाती धूप की तरह ताज़गी से भरी हुई है जो न केवल कैंसर से लड़ते मरीज़ के लिए बल्कि हम सभी के लिए जो अपने-अपने हिस्से की लड़ाई लड़ते आए हैं, कभी न हार माननेवाली उम्मीद की किरण है।

 

 ‘शरीर के अन्‍दर बीमारी से लड़ना किसी अँधेरी गुफ़ा के भीतर घुसते जाना है, इस विश्वास के साथ कि इसका अन्तिम सिरा रौशनी से भरा होगा। काश, मैं अनन्या से मिलकर उन्हें बता सकता कि उन्होंने कितनी ख़ूबसूरती से कैंसर से लड़ाई की कहानी इस किताब में लिखी है ।’    

—युवराज सिंह

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