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Tirange Ko Kabhi Jhukane Na Doge: Deshbhakti Ke Pavan Geet

by Shankar Dwivedi
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789394871021
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 208
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): Communication & Social Skills

शंकर द्विवेदी—ब्रजभाषा व हिंदी खड़ी बोली के मूर्धन्य कवि शंकर द्विवेदी सन् 1960 से सन् 1980 के दशकों तक अखिल भारतीय स्तर के लब्ध प्रतिष्ठित कवि व शिक्षाविद् रहे हैं। उनका मूल नाम शंकरलाल द्विवेदी था किंतु काव्य-जगत् में वे शंकर द्विवेदी उपाख्य से ही सम्मान पाते रहे हैं। लगभग दो दशकों तक वे अखिल भारतीय कवि-सम्मेलनों, साहित्यिक गोष्ठियों, प्रमुख समाचार पत्र-पत्रिकाओं एवं आकाशवाणी केंद्रों से प्रकाशित-प्रसारित अपनी उद्भट काव्य प्रतिभा के कारण साहित्याकाश के दीप्तमान नक्षत्र के समान जगमगाते रहे।राष्ट्रकवि ‘दिनकर’ के अवसान के पश्चात् हिंदी काव्य-जगत् में वीर रस के स्वर का जो शून्य उपस्थित हुआ, शंकर द्विवेदी की वाणी ने उसकी पूर्ति करते हुए साहित्य कोष में अविस्मरणीय योगदान दिया। वीर रस में पगी उनकी ओजमयी वाणी पर मुग्ध होकर राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी ने उन्हें ‘आधुनिक दिनकर’ कहकर संबोधित किया था। वीर रस में काव्य-दक्ष श्री द्विवेदी को शृंगार रस में भी दक्षता हासिल थी। संयोग तथा वियोग दोनों ही शृंगारिक पक्षों पर उनकी लेखनी समानाधिकृत रूप से समृद्ध थी। उनका कंठ-माधुर्य बरबस ही श्रोताओं को सम्मोहन-पाश में बाँध लेता था।प्रस्तुत काव्य-संग्रह ‘तिरंगे को कभी झुकने न दोगे’ शंकर द्विवेदी कृत राष्ट्रीय व सांस्कृतिक चेतना युक्त काव्य का अद्भुत संकलन है। सन् 1962 से सन् 1971 तक हमारे राष्ट्र को जिन युद्धों की विभीषिका से जूझना पड़ा, प्रस्तुत संग्रह की कविताओं में उनकी प्रतिध्वनियाँ स्पष्ट सुनी जा सकती हैं। कविवर शंकर द्विवेदी का यह काव्य-संकलन न केवल हमारे राष्ट्राभिमान का द्योतक है अपितु हमारे गौरवशाली सांस्कृतिक विराट का भी मंगलाचरण है।

राहुल द्विवेदी—सुकवि राहुल द्विवेदी का जन्म 3 दिसंबर, 1972 को जनपद हाथरस (उ.प्र.) की सासनी तहसील में हुआ। वे कविवर शंकर द्विवेदी के कनिष्ठ आत्मज हैं। पिलानी स्थित बिरला पब्लिक स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम वि.वि. से वास्तुकला में डिप्लोमा, आगरा वि.वि. से हिंदी साहित्य में स्नातक व परास्नातक, रूहेलखंड वि.वि. से शिक्षा स्नातक तथा सागर वि.वि. से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की उपाधियाँ अर्जित कीं। वे डी.पी.एस. मुरादाबाद, बिरला स्कूल मथुरा, जागरण स्कूल अलीगढ़ सरीखी संस्थाओं में हिंदी अध्यापन से संबद्ध रहे हैं तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, देहरादून में भाषा-विशेषज्ञ के पद पर भी कार्यरत रहे हैं। संप्रति दिल्ली पब्लिक स्कूल, विंध्यनगर, सिंगरौली (म.प्र.) में हिंदी प्रवक्ता एवं विभागाध्यक्ष के पद पर आसीन हैं।आशीष द्विवेदी—आशीष द्विवेदी का जन्म 29 सितंबर, 1969 को जनपद हाथरस (उ.प्र.) की सासनी तहसील में हुआ। वे कविवर शंकर द्विवेदी के ज्येष्ठ आत्मज हैं। उन्होंने आगरा वि.वि. से विज्ञान स्नातक एवं शिक्षा स्नातक की उपाधियाँ अर्जित की हैं। संप्रति वे हाथरस के प्रतिष्ठित पी.बी.ए.एस. इंटर कॉलेज में गत 23 वर्षों से गणित विषय के अध्यापन से संबद्ध हैं। एक उत्कृष्ट वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर के रूप में विख्यात आशीष की खींची छवियाँ अनेक प्रदर्शनियों व वाइल्ड लाइफ पत्रिकाओं में छपने का गौरव पाती रहती हैं। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा आयोजित ‘चंबल सैंक्चुरी बर्ड फेस्टिवल’ में उनके फोटो की प्रदर्शनी लगाई जा चुकी है। वे अपने नगर की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था ‘उद्घोष’ के संस्थापक सचिव भी हैं।

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