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Trikon Ke Tinon Kon

by Harish Pathak
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788173157509
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 224
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 268 grams
  • BISAC Subject(s): Language Arts / Composition & Creative Writing

सच कितने भी पहरों में कैद हो, अँधेरे की कितनी भी परतें उसे दबाएँ, पर उसका विकिरण, उसका तेज सबको चीरकर बाहर आ ही जाता है, सबसे ऊपर, सबसे अलग एक सच वह है, जो अक्षरों के साथ कागज पर उतरता है। एक सच वह भी है, जो अक्षरों से दूर चुपके से खड़ा होता है। यही चुप-चुप खड़ा सच हमें अहसास कराता है कि धूप चाहे बदली में ढक गई हो, सूरज चाहे हाँफने लगा हो, धरती बंजर से हरियाली में तब्दील हो गई हो, नीला जल अपनी शिनाख्त खो बैठा हो, हवाओं ने अपनी शीतलता कम कर दी हो, पर मैं वहीं हूँ—अपनी जगह विश्‍वास के न हिलनेवाले पाँवों पर खड़ा।प्रस्तुत पुस्तक में कल का सच, आज भी उसी विकृति और विद्रूपता के साथ मौजूद है। आज भी याददाश्त न खोनेवाले दिमागों में दर्ज है कि कैसे एक पवित्र जल में स्नान की चाह रखनेवाली महारानी को देखने उमड़ी भीड़ पचपन लोगों की जल-समाधि ले बैठी थी, कैसे मृत घोषित कर दिया गया एक संगीतकार आज भी अपनी धुनें बिखेर रहा है, कि गुंडे आज भी अखबारों और छोटे परदे पर रोज-रोज जगह पा रहे हैं, कि श्‍वसुर को मात देनेवाला एक दामाद वक्‍त से ही मात खा बैठा, कि हत्यारों की कहानी गढ़ते-गढ़ते बीहड़ों के प्रतिनायक जीवन के बीहड़ में आज कितने लाचार और पस्त हैं।ये रपटें,जो समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं—यह बताने में पूरी तरह सक्षम हैं कि देश, काल और मौसम के बदलने से न तो जीवन मरता है, न सच मिटता है। मनोरंजक, ज्ञानपरक एवं कौतूहलपूर्ण रचनाओं का संग्रह है— त्रिकोण के तीनों कोण।

हरीश पाठकजन्म : 20 दिसंबर, 1957 को ग्वालियर में। कृतित्व : मूलत: कथाकार। कहानियों की दो पुस्तकें ‘सरेआम’ व ‘गुम होता आदमी’ प्रकाशित।ग्वालियर के दैनिक ‘स्वदेश’ से पत्रकारिता की शुरुआत। ‘मुक्‍ता’ (दिल्ली प्रेस पत्रिका समूह), ‘धर्मयुग’ (टाइम्स ऑफ इंडिया, मुंबई) से संबद्ध रहे। ‘कुबेर टाइम्स’ (कार्यकारी संपादक), दैनिक ‘हिंदुस्तान’ (समन्वय संपादक), ‘एकता चक्र’ व ‘पूर्णविराम’, नवभारत समूह (संपादक) के पद पर रह चुके हैं। इन दिनों ‘राष्‍ट्रीय सहारा’ के पटना संस्करण के स्थानीय संपादक हैं।नौ साल तक ‘धर्मयुग’ में प्रकाशित उनका स्तंभ ‘सुर्खियों के पीछे’ खासा चर्चित रहा। इसके लिए उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिष्‍ठित ‘गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार’ मिला। जी टी.वी. के इलेक्शन स्पेशल में एक सौ दस कड़ियों में प्रसारित धारावाहिक ‘जन गण मन’ और साठ कड़ियों में प्रसारित ‘पोल टाइम्स’ का लेखन भी उन्होंने किया। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित ‘राजेंद्र माथुर स्मृति पत्रकारिता फेलोशिप’ के अंतर्गत ‘आंचलिक समाचार-पत्रों की राष्‍ट्रीय पत्रकारिता’ विषय पर किए उनके शोध पर पुस्तक ‘नाभि में तीर’ व ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’ शीघ्र प्रकाश्य।संपर्क : ‘अनहद’, ई-601-602, गौरव रेसीडेंसी-1, महापौर बँगले के सामने, बेवरली पार्क, मीरा रोड-401107, ठाणे (महाराष्‍ट्र) फोन : 09869153692

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