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Trin Dhari Ot

by Anamika
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355183910
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 224
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): Literary

(अनामिका का यह उपन्यास सीता के व्यक्तित्व के गहनतम पक्षों का उद्घाटन एक ऐसी भाषा में करता है जिसमें शताब्दियों की अन्तर्ध्वनियाँ हैं। यह इतनी व्यंजक, सरस और ठाठदार है जितनी भामती, भारती, लखिमा देवी की परम्परा की मैथिल स्त्री की भाषा होनी ही चाहिए! सीता तर्क करती हैं पर मधुरिमा खोए बिना, "सिया मुस्काये बोलत मृदु बानी" वाली लोकछवि धूमिल किये बिना, एक क्षण को भी सन्तुलन खोए बिना वे सबसे राय-विचार करती हैं-माँ-बाबा से, बहनों से, बालसखाओं से, सब महाविद्याओं से, वनदेवियों, आदिवासी स्त्रियों से, वाल्मीकि से, राम से, लक्ष्मण से, लव-कुश से, केवट-वधू से, अग्नि से, शम्बूक बाबा और शूर्पणखा से, स्वयं से और वैद्यराज के अनुगत रूप में रुद्रवीणा सीखने आये रावण से भी। वे एक सहज प्रसन्न सीता हैं जिन्होंने एकल अभिभावक के सब दायित्व हँसमुख ढंग से निभाये हैं। वाल्मीकि के आश्रम में आये ऋषि-मुनियों से, आश्रम के एक-एक पेड़-पौधे, जीव-जन्तु से उनका सहज संवाद का नाता है। वे वैद्य के रूप में एक पर्यावरणसजग सीता हैं और उन्हें पारिस्थितकीय स्त्री-दृष्टि के आलोक में भी पढ़ा-समझा जा सकता है। राम से भी उनका पत्राचार बना हुआ है-पति-पत्नी राय करके ही अलग हुए हैं। सीता जंगल में राक्षस सन्ततियों के लिए एक पाठशाला चलाती हैं क्योंकि उनका दृढ़ मत है कि प्रकृति और संस्कृति के बीच के द्वन्द्व में आदिवासी/राक्षस संस्कृति का हिंसक शमन उन्हें हमेशा प्रतिक्रियावादी ही बनाये रखेगा। युद्ध नहीं, सरस शिक्षा है असल समाधान। मर्यादा पुरुषोत्तम यहाँ सीता के हर निर्णय का आदर करते हैं पर युगीन धर्मशास्त्र राम को हृदय की बात मानने से रोकता है। कई तरह की ऊहापोह के बाद क्या निर्णय लेते हैं दोनों मिलकर-यह तो आप उपन्यास में ही पढ़ें।

अनामिका-साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा अन्य कई राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित। अनामिका का जन्म 17 अगस्त, 1961 को मुज़फ्फ़रपुर, बिहार में हुआ। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी की प्रोफ़ेसर हैं। देश-दुनिया की बहुतेरी भाषाओं में अनूदित उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं-अनुष्टुप, बीजाक्षर, कविता में औरत, दूब-धान, खुरदरी हथेलियाँ, टोकरी में दिगन्त, पानी को सब याद था, वर्किंग विमेन्स हॉस्टल और अन्य कविताएँ, बन्द रास्तों का सफ़र, My Typewriter is My Piano, Vaishali Corridors (कविता-संकलन); अवान्तर कथा, दस द्वारे का पींजरा, तिनका तिनके पास, आईनासाज, तृन धरि ओट (उपन्यास); स्त्रीत्व का मानचित्र, साहित्य का नया लोक, स्वाधीनता का स्त्री-पक्ष, त्रिया चरित्र : उत्तरकांड, Feminist Poetics : Where Kingfishers Catch Fire, Donne Criticism Down the Ages, Treatment of Love and War in Post-War Women Poets, Proto-Feminist Hindi-Urdu World (1920-1964), Translating Racial Memory, Hindi Literature Today (आलोचना); स्त्री विमर्श का लोकपत्र, स्त्री विमर्श की उत्तरगाथा, स्त्री मुक्ति : साझा चूल्हा, मन माँजने की ज़रूरत, मौसम बदलने की आहट, हिन्दी साहित्य का उषाकाल (निबन्ध-संकलन); कहती हैं औरतें, रिल्के की कविताएँ-अब भी वसन्त को तुम्हारी ज़रूरत है, रवीन्द्रनाथ टैगोर, नागमण्डल, द ग्रास इज़ सिगिंग, मेरा शरीर मेरी आत्मा का सौतेला बेटा, खोयी हुई चीजें, बारिश ने हाथ उठाकर बस रुकवाई (अनुवाद); भारतीय कविता सीरीज़ व बीसवीं सदी का हिन्दी महिला लेखन (सम्पादन); Founder-Editor : Pashyantee Bilingual (A Womanist Journal Dedicated to Samrasya : Equipoise)।ईमेल: anamikapoetry@gmail.com

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