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Upanyaskar Premchand Ki Samajik Chinta

by Sarita Rai
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170554530
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 164
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

उपन्यासकार प्रेमचन्द की सामाजिक चिन्ता - प्रेमचन्द-युगीन समाज में जो भी ठोस सामाजिक, राजनीतिक स्थितियाँ थीं, उन्हें पूरी तरह ध्यान में रखकर ही प्रेमचन्द ने अपने औपन्यासिक पात्रों की रचना की और इन पात्रों द्वारा अपनी निश्चित सामाजिक-राजनीतिक चिन्ता को सामने रखा। यह अकारण नहीं है कि उनके अधिकांश पात्र किसान-मज़दूर और ज़मींदारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दोनों के बीच की कड़ी के रूप में सूदखोर, साहूकार, महाजन, सरकारी-ग़ैर-सरकारी कर्मचारी, वकील, अध्यापक, पंडित-पुरोहित भी आते हैं।इन सबके चरित्र द्वारा प्रेमचन्द ने भारतीय समाज का एक यथार्थ चित्र अपने उपन्यासों में प्रस्तुत किया है। लेकिन यह सब करते हुए उनकी दृष्टि शोषित-उत्पीड़ित किसान-मज़दूर और पददलित निम्न जातियों की वास्तविक मुक्ति की ओर ही अधिक रही है। इस मुक्ति में सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक मुक्ति के साथ ही अज्ञान से मुक्ति एक महत्त्वपूर्ण मुद्दे के रूप में प्रेमचन्द के सामने थी।सरिता राय के अनुसार इससे यह तथ्य एकदम स्पष्ट है कि उनकी सामाजिक चिन्ता की पृष्ठभूमि अत्यन्त व्यापक थी। इसीलिए प्रेमचन्द को सामाजिक सरोकारों का रचनाकार माना जाता है।

सरिता रायजन्म : 2 जनवरी, 1968 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जनपद के बहादुरपुर गाँव में।शिक्षा: इंटरमीडिएट तक की शिक्षा उसी गाँव में। गोरखपुर विश्वविद्यालय से बी.ए. और हिमाचल विश्वविद्यालय, शिमला से एम.ए. हिन्दी और एम. फिल. की परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी, प्रथम स्थान में उत्तीर्ण कीं। यहीं से 'सोद्देश्यता के सन्दर्भ में प्रेमचन्द के उपन्यास' विषय पर 1993 में पीएच. डी. की उपाधि अर्जित की।प्रकाशन : कबीर और तुलसी की सामाजिक दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन, प्रेमचन्द के उपन्यासों में सामाजिक चिन्ता।

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