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Urdu Ke Pratinidhi Shayar Aur Unaki Shayari

by Ed. by Vashishtha Anoop
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789369449842
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 192
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

उर्दू शायरी में एक ख़ास तरह की कशिश होती है जो सुनने या पढ़ने वालों को सहज ही आकर्षित कर लेती है। इसके एक-एक शेर में एक-एक कहानी भरी होती है। संक्षिप्तता, सारगर्भिता और तत्काल प्रभावोत्पादकता इसकी निजी ख़ासियत है। इधर यह देखा जा रहा है कि नयी पीढ़ी उर्दू शायरी के प्रति अधिक उत्सुक हुई है। कक्षाओं में किसी शायर के एक शेर की चर्चा कर देने पर विद्यार्थी उसके संग्रह की तलाश में लग जाते हैं। इधर एक बात और हुई है कि उर्दू अदीबों की पुस्तकें उर्दू की तुलना में हिन्दी में अधिक पढ़ी जा रही हैं। उर्दू के कई साहित्यकारों ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके साहित्य के पाठक हिन्दी में अधिक हैं। कुछ ने तो यहाँ तक कहा है कि उनका साहित्य हिन्दी में ही जीवित रहेगा।इधर सुखद बात यह है कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की कक्षाओं में उर्दू साहित्य का इतिहास और उर्दू के कई श्रेष्ठ शायरों की कविताएँ पढ़ायी जा रही हैं। ऐसा कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी हो रहा है। ऐसे में उर्दू-कवियों के एक ऐसे संग्रह की महती आवश्यकता अनुभव हो रही थी, जिसमें एक साथ उर्दू के श्रेष्ठ शायरों की प्रतिनिधि शायरी संकलित हो। यह संग्रह इस दिशा में एक सार्थक और ज़रूरी पहल है। इस संकलन में उर्दू के 18 शायरों का परिचय और उनकी चुनी हुई कविताएँ दी जा रही हैं। यह सूची और बढ़ायी जा सकती थी लेकिन ऐसा करने पर यह पुस्तक काफ़ी भारी-भरकम हो जाती। इसके आगामी संस्करण में कुछ और कवियों को शामिल किया जा सकता है।मुझे उम्मीद है कि उर्दू कविता का यह संग्रह हिन्दी के जिज्ञासु व जागरूक विद्यार्थियों, विद्वानों और साहित्य-प्रेमियों द्वारा समादृत होकर उनका ज्ञानवर्धन करेगा।

वशिष्ठ अनूपजन्म : एक जनवरी 1962, ग्राम सहड़ौली, पो. फरसाड़-साऊँखोर (बड़हलगंज), गोरखपुर, उ. प्र.। प्रकाशित साहित्य : कविता, गीत, ग़ज़ल, समालोचना और सम्पादन सहित कुल 59 पुस्तकें प्रकाशित।ग़ज़ल और गीत-संग्रह : स्वप्न के बाद, बंजारे नयन, रोशनी ख़तरे में है, बेटियों के पक्ष में, रोशनी की कोपलें, अच्छा लगता है, मशालें फिर जलाने का समय है, तेरी आँखें बहुत बोलती हैं, इसलिए, घरों पर गिद्ध मँडराने लगे हैं, गर्म रोटी के ऊपर नमक-तेल था, बारूद के बिस्तर पर, सुन्दर बिहान होई (भोजपुरी ग़ज़लें)।आलोचना पुस्तकें : समकालीन कविता के प्रतिमान, आधुनिक हिन्दी कविता की वैचारिक पृष्ठभूमि और सृजन, हिन्दी कविता के प्रमुख विमर्श, कविता के जनवादी स्वर, जगदीश गुप्त का काव्य-संसार, हिन्दी ग़ज़ल का स्वरूप और महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर, हिन्दी ग़ज़ल की प्रवृत्तियाँ, हिन्दी गीत का विकास और प्रमुख गीतकार, हिन्दी साहित्य का अभिनव इतिहास, गीत का आकाश, हिन्दी भाषा, साहित्य एवं पत्रकारिता का इतिहास, हिन्दी की जनवादी कविता, अँधेरे में : एक पुनर्विचार, असाध्यवीणा की साधना, उर्दू के प्रतिनिधि शायर और उनकी शायरी, लोकसाहित्य का मर्म, हिन्दी ग़ज़ल का परिप्रेक्ष्य इत्यादि।सम्मान एवं पुरस्कार : दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार। कुछ गीत फ़िल्मों और धारावाहिकों में, कुछ गीत और ग़ज़लें कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल। कुछ कविताओं का अन्य भाषाओं में अनुवाद। ग़ज़लों और गीतों पर कई विश्वविद्यालयों में पीएच.डी., एम.फिल. और लघुशोध कार्य। साहित्यिक पत्रिका 'शब्दार्थ' का सम्पादन।सम्प्रति : प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, बीएचयू।

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