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Us Kavita Ko Namaskar Karte Huye

by Kirtikumar Singh
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789352292592
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 152
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

आधुनिक हिन्दी कविता में 'सहजतावाद' काव्यान्दोलन के प्रवर्तक कीर्तिकुमार सिंह का यह पाँचवाँ कविता संग्रह है। कीर्तिकुमार सिंह ने 'सहजतावाद' आन्दोलन की शुरुआत 1993 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की थी।छायावादोत्तर हिन्दी कविता के साथ एक विचित्र विडम्बना रही। हर कवि यह दावा कर रहा था कि वह आम आदमी के पक्ष में खड़ा है, उसके संघर्षों के साथ है और उसके लिए कविता लिख रहा है। बात अपनी जगह सही थी; लेकिन कवि आम आदमी के पक्ष में क्या लिख रहा है, यह आदमी की समझ से बाहर था। आम आदमी के संघर्ष में उसके साथ खड़ी कविताएँ इतनी दुर्बोध रहीं कि आम आदमी उन्हें समझ ही नहीं सकता था। अत्यन्त जटिल, दुरूह और बोझिल कविताएँ लिखने वाले कवि, कहने को तो आम आदमी के लिए लिख रहे थे, लेकिन वे व्यवहार में आम आदमी से तथाकथित एक सम्मानजनक दूरी भी बनाये हुए थे। वे खुद ही आम आदमी भी बने हुए थे और खुद ही आम आदमी के मसीहा भी । मूल रूप में वे आम आदमी के उस वकील की तरह रहे, जिसकी बहस और जिरह आम आदमी केवल मुँह खोले देखता रहा, समझ नहीं पाया।नागार्जुन और धूमिल जैसे कुछ कवि, जो जनता का वकील बनने के बजाय जनता के साथ खड़े होकर जनता के संघर्ष में शामिल हुए, जनता के दिलों में जगह बनाने में सफल रहे उनकी कविताओं को आम आदमी पढ़कर समझ सकता है।'कीर्तिकुमार सिंह की दार्शनिक कविताएँ' की लम्बी भूमिका 'सहजतावाद' के मर्म को उद्घाटित करती है। भाव की दृष्टि से कविता चाहे जितनी गहरी हो; कोई भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति उसे पढ़कर समझ सके, यह कविता की अनिवार्य विशेषता होनी चाहिए। कीर्तिकुमार सिंह का यह कविता-संग्रह उसी दिशा में एक और प्रयास है।

कीर्तिकुमार सिंहजन्म : 19 मई 1964 को इलाहाबाद जिले के कोटवा नामक गाँव में। शिक्षा : बी. ए., एम.ए. और डी.फिल. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से। शिक्षा में एक मेधावी छात्र के रूप में कई स्वर्ण पदक प्राप्त, जिनमें से एक स्वर्ण पदक 'संयुक्त राष्ट्र संघ' से।कविता, कहानी, लघुकथा, उपन्यास और दर्शन के क्षेत्र में सक्रिय।प्रकाशित कृतियाँ : जगद्गुरु कमीनिस्टाचार्य प्रयागपीठाधीश्वर (उपन्यास); अद्भुत प्रेम कथाएँ, दारागंज वाया कटरा, आप बहुत..... बहुत... सुन्दर हैं!, असाधारण प्रेम कथाएँ (कहानी-संग्रह); अधूरी दास्तान, छोटी सी बात, एक टुकड़ा रोशनी, बस इतना, दास्तान दर दास्तान, मेरी प्रतिनिधि लघुकथाएँ, बूँद बूँद बतरस (लघुकथा-संग्रह); उस कविता को नमस्कार करते हुए, कीर्तिकुमार सिंह की दार्शनिक कविताएँ, दिल्ली के दो-पाया कुत्ते, मन्दाकिनी घाटी (कविता-संग्रह): शिवा (कविता- कैसेट); पुरस्कार दर्शन, भारतीय दर्शन में दुःख और मुक्ति (दार्शनिक चिन्तन) ।सम्प्रति : अध्यक्ष, दर्शन विभाग, श्यामाप्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), फाफामऊ, इलाहाबाद।सम्पर्क : 15/6, स्टैनली रोड, सिविल लाइंस, इलाहाबाद- 211001 (उत्तर प्रदेश)मो. : 9415094253ई-मेल : kirti.add123@gmail.com

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