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Vandana

by Sudhir Narain
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789357759342
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 2550
  • Original Price: INR 5400.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 5000 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

वन्दना विष्णु के सहस्र नामों पर सहस्र गीत हैं। गीतों में गुंजन है-भक्ति का, संगीत है संवेदना का। विष्णु व्यापी है-आकाश में, पृथ्वी में, पाताल में-यही नहीं ब्रह्माण्ड के कण-कण में। उसकी उपासना में निराकार साकार हो उठा है।इसमें विष्णु को पौराणिक स्वरूप में सीमित नहीं किया है। वह असीमित चैतन्य की चेतना का अनुभव है। भगवान विष्णु का ही यह अनुग्रह है कि वन्दना जैसी कृति किसी सपने की तरह साकार हो पायी ।यह पुस्तक केवल पुस्तक ही नहीं, उपासना की रोली-चन्दन, साधना का बेल पत्र है। प्रत्येक नाम की कविता, एक पवित्र ऋचा की प्रतीति देती है।यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं कि सुधीर नारायण जी एक साधक-लेखक हैं। विष्णु सहस्रनाम के गीत हमारी चेतना में आँखें खोलने लगते हैं। गंगा को विष्णुपदी कहते हैं। इस पुस्तक के पृष्ठ-पृष्ठ पर हम उसकी उत्ताल तरंगों का दर्शन करते हैं।इन सहस्र गीतों की रचना बारह वर्षों में हुई है। इसमें एक पूर्ण कुम्भ का अमृत भरा है।- यश मालवीय,कवि एवं लेखक

सुधीर नारायण जी का जन्म 10 जुलाई 1941 को इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए., एल. एल.बी. किया। सन् 1962 से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत प्रारम्भ की। दिनांक 04 फरवरी 1992 को इसी हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त हुए । 09 जुलाई 2003 को सेवा से निवृत्त हुए । 20 फरवरी 2002 को उनकी नियुक्ति कावेरी जल विवाद प्राधिकरण में हुई। जिसका विघटन 2018 में हुआ ।उनकी साहित्य एवं कला में आर्ट रुचि रही है। उन्होंने सात साल प्राइवेट आर्ट स्कूल में शिक्षा ग्रहण की तथा दो साल इलाहाबाद विश्वविद्यालय से चित्रकला विभाग से डिप्लोमा किया। इस पुस्तक में दर्शित चित्र उनके बनाये हुए हैं।उनकी लिखित दो अन्य पुस्तकें 'अन्तर्यात्रा' एवं 'सुरसरिता' हैं।

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