Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Varshavan Ki Roopkatha

by Vikas Kumar Jha
Save 30% Save 30%
Current price ₹175.00
Original price ₹250.00
Original price ₹250.00
Original price ₹250.00
(-30%)
₹175.00
Current price ₹175.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788126728381
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 288
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): Ancient & Classical

‘वर्षा वन की रूपकथा’ कर्नाटक प्रान्त के शिमोगा ज़िले में बसे एक छोटे-से गाँव अगुम्बे की अन्तरंग-अप्रतिम कथा है। सघन वर्षा होने के कारण इसे भारत का दूसरा ‘चेरापूँजी’ कहा जाता है। कन्नड़ थिएटर और सिनेमा के महानायक शंकर नाग ने इस गाँव को अपने सीरियल ‘मालगुडी डेज़’ में अमर कर दिया है। दरअसल, अंग्रेज़ी के उद्भट लेखक आर.के. नारायण लिखित ‘मालगुडी डेज़’ पर सीरियल बनाने का निर्णय लेकर इस काल्पनिक ग्राम को साकार करने का स्वप्न सँजोए शंकर नाग जब घूमते-भटकते अगुम्बे पहुँचे, तो उन्हें छूटते हुए लगा कि यही तो है नारायण का अद्भुत मालगुडी! घने जंगल, पहाड़ और बादलों की अहर्निश मधुर युगलबन्दी के बीच स्थित मलनाड अंचल के इस गाँव के सरल-सहज लोगों से मिलकर शंकर नाग को लगा कि शूटिंग के लिए यहाँ उन्हें अलग से कोई सेट लगाने की भी ज़रूरत नहीं। पूरा गाँव ही इस सीरियल का क़ुदरती सेट है। शूटिंग के दौरान आर.के. नारायण भी जब एक बार अगुम्बे आए, तो विस्मित हुए बिना न रह सके। बहरहाल, ‘मालगुडी डेज़’ सीरियल के बने वर्षों बीत चुके हैं पर अगुम्बे अभी भी मालगुडी को अपनी आत्मा के आलोक में बड़े दुलार से बसाये हुए है। और यह यों ही नहीं है। बाज़ारवाद के इस भीषण पागल समय में यह गाँव मनुष्यता का एक ऐसा दुर्लभ हरित मंडप है, जहाँ के विनोदप्रिय निष्कलुष लोग समस्त कामनाओं और आतप को हवा में फूँककर उड़ाते हुए मौन उल्लास की सुरभि में निरन्तर मधुमान रहते हैं। जीवनानंद के पराग से पटी पड़ी है अगुम्बे की धरती। अगुम्बे की ख्याति दुनिया में ‘किंग कोब्रा’ के एकमात्र मुख्यालय के रूप में भी है। जंगल-पर्वत और झमझम बारिश के बीच निरन्तर आलोड़ित कर्नाटक के इस गाँव की जैसी धारासार तन्मय गाथा एक हिन्दी भाषी लेखक द्वारा लिखी गई है, वह पृष्ठ-दर-पृष्ठ चकित करती हुई साधारण मनुष्य के जीते-जागते स्वप्नजगत में अद्भुत रमण कराती है। तृप्त और दीप्त करती है।

‘सुन्दरता ही संसार को बचाएगी’ यह टिप्पणी हर समय, हर समाज, हर देश और हरेक भाषा के वास्ते महान साहित्यकार दोस्तोयेव्स्की की है। सुन्दरता का आशय मात्र किसी महारूपा स्त्री या महारूपा प्रकृति से ही नहीं है। सुन्दरता का मतलब ठेठ ‘अगुम्बेपन’ से भी है। प्रेम का चिरन्तन आनन्द, उसकी अटूट शक्ति और विह्वल करुणा भी विशुद्ध अगुम्बेपन में ही है।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us