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Vayu Pradushan

by Sheo Gopal Mishra , Sunil Datt Tiwari
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789382901853
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 112
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 175 grams
  • BISAC Subject(s): Environmental / Pollution Control

वायु प्रदूबण' ओजोन ' परत में छेद होने से कुछ वर्षो बाद पृथ्वी का तापमान इतना बढ़ जाएगा कि पहाड़ों पर जमी सारी बर्फ पानी बनकर पृथ्वी को डुबो देगी । महानगरों में साँस लेने के लिए । एयर-मास्क की आवश्यकता पड़ने लगी है, अन्यथा आदमी का दम घुटता है । अम्लवर्षा के कारण पेड़-पौधों पर घातक प्रभाव पीरल‌क्ष‌ित हो रहे हैं । ऐसा वायु प्रदूषण के कारण हो रहा है । वह वायु, जो हर जीवधारी के लिए आवश्यक है, प्रदूषित हो रही है । अत: स्वाभाविक है कि हर व्यक्‍त‌ि इसके विषय में जाने और उसे शुद्ध बनाए रखने का प्रयास करे । वरना संसार में किसी भी जीव तथा वनस्पति का बच पाना असंभव हो जाएगा । इसी उद‍्देश्य की पूर्ति करती है पुस्तक -वायु प्रदूषण । इसमें वायुमंडल की संरचना, वायु के प्रमुख प्रदूषक, अम्लवर्षा, ग्रीन हाउस प्रभाव जैसी घटनाओं को प्रस्तुत करने के साथ ही वायु प्रदूषण को रोकने के उपायों की भी विस्तार से चर्चा की गई है । पुस्तक की भाषा इतनी सरल है कि आम आदमी भी इसको पढ़कर लाभान्वित होगा ।

डॉ. शिवगोपाल मिश्रडाँ. शिवगोपाल मिश्र ( जन्म सन् 1931) विज्ञान जगत् के जाने- माने लेखक हैं । आपने इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय से एम. एस. -सी. (कृषि रसायन) तथा डी. फिल‍्. की उपाधिया प्राप्‍त करने के बाद इसी विश्‍वविद्यालय में 1956 से लेकर 1991 तक क्रमश : लेक्चरर, रीडर प्रोफेसर और निदेशक (शीलाधर मृदा विज्ञान -शोध संस्थान) पदों पर अध्यापन और शोधकार्य का निर्देशन किया । आपने सूक्ष्म मात्रिक तत्त्व, फास्फेट, जैव उर्वरक पादप रसायन अम्लीय मृदाएँ, भारतीय कृषि का विकास, मिट्टी का मोल जीवनोपयोगी मात्रिक तत्त्व नामक पुस्तकों का प्रणयन किया है, जिनमें से कई पुस्तकें पुरस्कृत भी हो चुकी हैं । आपने मृदा प्रदूषण, वायु प्रदूषण तथा जल प्रदूषण के विषय में अनेकानेक शोधपरक निबंध प्रकाशित किए हैं । आप प्रारंभ से ही हिंदी में रुचि होने के कारण 1952 से विज्ञान परिषद्, प्रयाग से संबद्ध रहे हैं । आपने कई वर्षों तक मासिक पत्रिका ' विज्ञान ' का संपादन किया है । आप 1958 से ही ' विज्ञान परिषद् अनुसंधान पत्रिका' के प्रबंध संपादक है । हिंदी की वैज्ञानिक पत्रिकाओं में आपके कई सौ लेख प्रकाशित हो चुके हैं । आपने ' भारत की संपदा ' का संपादन तथा ' रसायन विज्ञान कोश ' का लेखन किया है ।डॉ. सुनील दत्त तियारीकृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्‍त करने के बाद मृदा विज्ञान तथा कृषि रसायन के क्षेत्र में शोधकार्य करके इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय के शीलाधर मृदा शोध संस्थान से 1992 में डी. फिल‍्. की उपाधि प्राप्‍त की । अनेक शोध निबंध तथा लोकप्रिय वैज्ञानिन्क लेख प्रकाशित।

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