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Veli Krisan Rukmani Ri

by Ed. by Prof. Tribhuvannath Shukla
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789388684859
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 736
  • Original Price: INR 1350.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 1000 grams
  • BISAC Subject(s): General

स्वनामधन्य महाराज पृथ्वीराज के उज्ज्वल यशस्वी नाम से कौन भारतीय परिचित नहीं है? जिस समय मुगल-साम्राज्य के आतंक ने हिन्दू-सूर्य महाराणा प्रताप के अटल पराक्रम और निस्सीम धैर्य को भी विचलित करने में कुछ बाकी न रखा था, और जिस समय अकबर जैसे अतुल बलधारी और विचक्षण सम्राट से विरोध करने के परिणाम में महाराणा को अपने प्राण की रक्षा के लिए निस्सहाय वन-वन में भूखे-प्यासे रह कर भटकना पड़ा था और इस असह्य दुःख से पीड़ित होकर जब वे अकबर की अधीनता स्वीकार करने को विवश हो गये थे, उस समय यदि किसी महापुरुष की अन्तरात्मा ने अखण्ड ज्योतिर्मय ओज का प्रकाश करते हुए, महाराणा के हृदय की आत्मग्लानि एवं आन्तरिक म्लानता और दैन्य के आवरणरूपी अन्धकार को हटाने का प्रयत्न किया तो वह श्रेय महाराज पृथ्वीराज के उस इतिहास एवं साहित्य-प्रसिद्ध पत्र को ही है कि जिसके एक-एक अक्षर को पढ़ कर आज भी भारतवासी अपने हृदय में आशा, स्फूर्ति, उत्साह, स्वदेश-गौरव और आत्म-बल का दीपक जला सकते हैं। यह बात ध्यान में रखने योग्य है कि महाराज पृथ्वीराज का दैन्य उस समय महाराणा प्रताप की अपेक्षाकृत समुन्नत एवं स्वच्छन्द दशा से कहीं विशेष बढ़ा-चढ़ा था। न कोई इनके निज की सैन्य थी और न कोई प्रबल सहायक ही ऐसा था कि जिस पर विश्वास करके ये स्वतन्त्रता के लिए प्रयत्न कर सकते थे। ऐसी दशा में रहते हुए भी भारतीय स्वतन्त्रता का निशिदिन जाप करने वाले इन वीर-शिरोमणि क्षत्रियपुत्र के हृदय में भारतीय स्वतन्त्रता का ध्वज सम्हालने वाले एकमात्र अग्रेसर महाराणा प्रताप के धर्म-हठ के प्रति निस्सीम श्रद्धा और सहानुभूति थी, जो उनके द्वारा लिखे हुए उक्त पत्र से प्रत्यक्ष प्रमाणित होती है। इन्हीं वीर महापुरुष महाराज पृथ्वीराज के काव्यात्मक व्यक्तित्व का स्वरूप निदर्शन करने एवं उनकी एक मुख्य काव्य-रचना का परिचयात्मक विवेचन कर रसिकों का हृदय तृप्त करने के हेतु हमारा यह विनम्र प्रयास है।

प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्लजन्म : 13 जुलाई 1953 ई., मधू का पूरा, करछना,इलाहाबाद (उ.प्र.)प्रकाशित कृतियाँ : रामचरितमानस के शब्दों का अर्थतात्त्विक अध्ययन, अवधी का स्वनिमिक अध्ययन,मध्यकालीन कविता का पाठ, कोश निर्माण : प्रविधि एवं प्रयोग, भाषायी औदात्य, विद्यापति, अनुबन्ध, रंगसप्तक, अवधी साहित्य की भूमिका, अवधी साहित्य के आधार स्तम्भ, अवधी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास, हिन्दी का अतीत और वर्तमान, हिन्दी कम्प्यूटिंग, कालिदास पर्याय कोश, भाग-1, भाग-2, सिद्धहेमचन्द शब्दानुशासनम्, हिन्दी क्रियाकोश, हिन्दी शब्द महार्णव भाग-1, भाग-2, रामचरितमानस शब्दानुक्रमकोश, कामायनी शब्दानुक्रमकोश, भारतीय बाल साहित्य की भूमिका, भारतीय बाल साहित्य का इतिहास, रामचरितमानस व्याकरण, अवधी लोकसाहित्य एवं संस्कृति, समीक्षक आचार्य नन्द दुलारे वाजपेयी, साहित्य के शाश्वत प्रतिमान, साहित्य, कला एवं संस्कृति, साहित्य को भोपाल सन्देश, साहित्य का समय ।सम्मान : फ्लोरिडा अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय मियामी, अमेरिका द्वारा 'विश्व तुलसी सम्मान' (1999)अध्यक्ष : भारतीय हिन्दी परिषद्, इलाहाबाद (उ.प्र.); राष्ट्रीय आल्हा अनुसन्धान परिषद्, जबलपुर (म.प्र.); राष्ट्रीय अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, न्यास, दिल्ली ।सम्प्रति : आचार्य एवं अध्यक्ष, हिन्दी एवं भाषाविज्ञान विभाग, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) । मो.: 9425044685

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