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Vismaya Ka Bakhan

by Yatindra Mishra
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350722015
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 184
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): Essays

पिछले एक दशक में फैली हुई यतीन्द्र मिश्र के संगीत एवं कला-चिन्तन की बानगी के तौर पर यह पुस्तक विस्मय का बखान आपसे संवादरत है। इस दौरान लेखक के द्वारा लिखे गये कला सम्बन्धी डायरियों के अंश, पढ़ी हुई पुस्तकों की स्मृतियाँ, स्मृति की खिड़की से खोजी गयी रूपंकर कलाओं की दुनिया, वरिष्ठ कलाकारों एवं मूर्धन्यों की कला यात्रा के प्रभावों की स्नेहिल झिलमिल तथा समय-समय पर साहित्य एवं संस्कृति के समाज में रमते हुए कुछ उत्साह, तो जिज्ञासा के साथ उसके शाश्वत कुछ व समकालीन प्रश्नों को भेदने के प्रयास का एक हार्दिक संगुम्फन है यह संचयन ।इस बहाने विभिन्न कला-रूपों पर एकाग्र इस आयोजन में भाषा भी कला के साथ अपनी उसी समावेशी प्रकृति को साथ लेकर आगे बढ़ती है, जिसके चलते कलाओं के आँगन में भाषा का प्रवेश तथा भाषा के संसार में कलाओं की जुगलबन्दी को कुछ अभिनव आशय सुलभ होता है। एक तरफ जहाँ यह पुस्तक रूपंकर अभिव्यक्तियों के समाज एवं उनकी स्वायत्तता पर गम्भीरता से विचार करती है, तो दूसरी ओर इसका वितान पं. मल्लिकार्जुन मंसूर, उस्ताद अमीर ख़ाँ, पं. भीमसेन जोशी से होता हुआ काशी की बाईयों समेत शैलेन्द्र, सत्यजित रे, साहिर लुधियानवी, निर्मल वर्मा, कुँवर नारायण, रसन पिया, लता मंगेशकर एवं ग़ालिब की दुनियाओं तक फैला है।संगीत और नृत्य पर विमर्श के बहाने, सिनेमा और साहित्य के आन्तरिक रिश्तों के चलते तथा तमाम सारे कलाकारों, मूर्धन्यों, वाग्गेयकारों, कवियों-लेखकों, नर्तक-नर्तकियों के संस्मरणों व संवादों को आधार बनाकर उनकी कला व्याप्ति का बखान, यह पुस्तक अपनी पूरी आत्मीयता के साथ करती है, जिसका कला-परक आमंत्रण हर पृष्ठ पर पूरी प्रखरता से उजागर हुआ है।

हिन्दी कवि, सम्पादक और संगीत अध्येता हैं। उनके अब तक तीन कविता संग्रह: यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप प्रकाशित हैं। साथ ही, शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी, नृत्यांगना सोनल मानसिंह एवं शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ पर हिन्दी में प्रामाणिक पुस्तकें क्रमशः गिरिजा, देवप्रिया एवं सुर की बारादरी भी प्रकाशित हुई हैं। वरिष्ठ कवि कुँवर नारायण पर एकाग्र संचयन क्रमशः कुँवर नारायण- 'संसार' एवं 'उपस्थिति', अशोक वाजपेयी के गद्य का एक संचयन 'किस भूगोल में किस सपने में' तथा अज्ञेय काव्य से एक चयन 'जितना तुम्हारा सच है' प्रकाशित हैं। हाल ही में कन्नड़ शेव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन किया है, जो 'भैरवी' नाम से प्रकाशित है। हाल ही में कुँवर नारायण के नोट्स एवं अन्तःप्रक्रियाओं का संचयन 'दिशाओं का खुला आकाश' नाम से सम्पादित किया है। इनके अतिरिक्त फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं एवं गीतों के चयन क्रमशः 'यार जुलाहे' तथा 'मीलों से दिन' नाम से सम्पादित हैं। 'गिरिजा' का अंग्रेजी, 'यार जुलाहे' का उर्दू तथा अयोध्या श्रृंखला कविताओं का जर्मन अनुवाद भी प्रकाशित है।उन्हें रज़ा पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार, हेमन्त स्मृति कविता सम्मान, राजीव गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, परम्परा ऋतुराज सम्मान सहित भारत सरकार के संस्कृति मन्त्रालय की कनिष्ठ शोधवृत्ति एवं सराय, नयी दिल्ली की स्वतन्त्र शोधवृत्ति मिली हैं। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैंड, मॉरीशस एवं अबु धाबी की यात्राएँ की हैं। अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउंडेशन न्यास के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं। सम्पर्क : yatindrakidaak@gmail.com

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