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Wah Madiyara Sanp

by Vijay Bahadur Singh
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789387409873
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 264
  • Original Price: INR 695.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 500 grams
  • BISAC Subject(s): Memoirs

जीवन को अलग-अलग निगाह से देखने और पहचानने की एक स्वच्छन्द कोशिश है। इसमें जितना समय है, उतना ही समय की गवाही देते आदमी की रंगारंग फितरतें भी। यह कहना गुनाह नहीं होगा कि लेखक की स्मृतियों की सीमा ही, इनकी भी सीमा है अन्यथा तो ये सब जो यहाँ याद किये गये हैं, सचमुच याद करने लायक हैं। ये सब अलग-अलग किस्में हैं, स्वभावतः अपनी विरलता का सौन्दर्य और रोमांच लिए हुए। जिस भाषा और शिल्प के मुहावरे में ये बाँधे गये हैं उसमें उनके व्यक्तित्व की वे सुगन्धें धीमे-धीमे मुस्करा रही हैं, जो कई अन्यों के भी अनुभवों में होंगी।

विजय बहादुर सिंह16 फ़रवरी 1940, गाँव जयमलपुर, ज़िला-अम्बेडकर नगर (पूर्व में फ़ैज़ाबाद), उ.प्र. में जन्म।आलोचना, कविता, संस्मरण, जीवनी लेखन के अलावा कवि भवानीप्रसाद मिश्र, दुष्यन्त कुमार और आलोचक आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी रचनावली का सम्पादन।आजीविका से अध्यापक रहे विजय बहादुर सिंह ने उच्च और स्कूली शिक्षा पर भी कुछेक पुस्तकें लिखी हैं। 'आज़ादी के बाद के लोग' उनके स्वातन्त्र्योत्तर भारतीय समाज के चारित्रिक प्रगति और पतन से सम्बन्धित लेखों की चर्चित पुस्तक है।हिन्दू धर्म, भारतीय संस्कृति के सवालों पर भी विजय बहादुर सिंह ने स्वयं को जब-तब एक सचेत नागरिक की ज़िम्मेदारियों के बतौर केन्द्रित किया है।कई विलक्षण प्रतिभाओं-नागार्जुन, भवानीप्रसाद मिश्र के अलावा उन्होंने वसन्त पोतदार, शलभ श्रीराम सिंह, मैत्रेयी पुष्पा, शंकर गुहा नियोगी के शब्द-कर्म का विवेचन और सम्पादन किया है।कविता के अब तक नौ संकलन आ चुके हैं। एक आलोचक के रूप में कविता, कहानी, उपन्यास विधा में उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज की है।सम्पर्क : 29, निराला नगर, दुष्यन्त कुमार मार्ग, भोपाल-462003मोबाइल : 094250-30392

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