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Yaadon Ka Indradhanush

by Rekha Maitra
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350008614
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 76
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

रेखा मैत्र की कविताओं में अनुभवगत प्रेषणीयता और अभिव्यक्तिगत प्रेषणीयता का एक समस्तर प्राप्त होता है। यह अनुभवों का वह विस्तृत क्षेत्र है, जहाँ केवल मारामार नहीं है। यहाँ मानव प्रेम जीवित है, प्रकृति के प्रति सौन्दर्य दृष्टि जीवित है। आज का कवि प्रेम के व्यापक धरातल का पक्षधर है। परन्तु इसे हम रोमान की वापसी नहीं कहेंगे। कथ्य और रूप की प्रेषणीयता ने पुरानी हिन्दी में भी जान डाली है। कवयित्री ने अपने चारों तरफ यादों का इन्द्रधनुष बना है। 'सिन्दूरी सुबह आस्ट्रिया की...' में यह पूरी शान से मौजूद है । कविता की एक बानगी देखिए- सुबह की सन्दली हवा के झोंके / क्या खूब चले आते हैं / एकदम तुम्हारी ही तरह / पहले चेहरे को दुलारते हैं / फिर घिरते हैं आसपास.. . । कवयित्री ने प्रकृति के साथ-साथ प्रवास की कविताएँ भी लिखी हैं ऐसी कविताएँ इस संग्रह में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं। 'स्विट्जरलैंड की एक शाम' कविता में प्रकृति और प्रवास का नज़ारा अद्भुत है- पहाड़ों की गोद में / नन्ही बच्ची-सा / दुबक गया है मन! / ...आज इन पहाड़ों ने / फिर वही उपहार दिया है / इन नजारों की सूरत में! एक तरह से यह भी कहा जा सकता है कि रेखा मैत्र की कविताएँ प्रेम, प्रकृति, प्रवास, जिन्दगी को भरपूर नजरिये से देखती कविताएँ हैं। रेखा मैत्र का यह संकलन विविधताओं से भरा अनूठा एवं रोचक संग्रह है। इनकी कविताओं में आधुनिक कविता का प्रगतिशील रूप आर-पार झलकता है।

रेखा मैत्रबनारस (उ.प्र.) में जन्म। प्राथमिक शिक्षा बनारस में होने के बाद आपने सागर विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम.ए. किया। तदनन्तर, मुम्बई विश्वविद्यालय में टीचर्स ट्रेनिंग में डिप्लोमा किया। इसके अलावा, आपने केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। कुछ समय तक मध्य प्रदेश में आयोजित 'अमरीकी पीस कोर' के प्रशिक्षण कार्यक्रम में अमरीकी स्वयंसेवकों को आपने हिन्दी भाषा का प्रशिक्षण दिया। फिर 5-6 वर्षों तक राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के मुम्बई स्थित हिन्दी शिक्षण योजना के अन्तर्गत विभिन्न केन्द्रीय कार्यालयों/उपक्रमों/कम्पनियों के अधिकारियों और कर्मचारियों को हिन्दी भाषा का प्रशिक्षण दिया ।अमरीका में बसने के बाद आपने अमरीका स्थित 'गवर्नेस स्टेट यूनिवर्सिटी' से कुछ ट्रेनिंग कोर्स किए और कुछ समय तक वहाँ अध्ययन कार्य किया। फिर कुछ समय के लिए आप मलेशिया में रहीं और अमरीका में अंकुरित काव्य-लेखन यहाँ पल्लवित हुआ। आजकल आप भाषा के प्रचार-प्रसार से जुड़ी साहित्यिक संस्था 'उन्मेष' के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हैं और काव्य-लेखन में मशगूल हैं।

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