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Yoddha Sannyasi

by Sujata
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789369442737
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 222
  • Original Price: INR 595.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): Literary

योद्धा संन्यासी बनना आसान नहीं है, परम निर्भीक ही इस पदनाम से सुशोभित हो सकता है। उस ज़माने के किसी संन्यासी द्वारा किसी महिला को सहजता के साथ अपने मित्र कहने का साहस होना सिर्फ़ एक योद्धा में ही सम्भव था, यह साहस तो आज भी किसी संन्यासी में दृष्टिगोचर नहीं होता।आज भी विदेशी सभ्यता की महिलाओं की भारतीय धार्मिक समाज निन्दा करना अपना कर्तव्य समझता है। उन्हीं महिलाओं के बारे में भरी सभा में यह कहना कि 'एक हज़ार अमेरिकन स्त्रियों की तरह अगर भारत में बना पाया, समझँगा माँ जगदम्बा ने मेरा जन्म लेना सार्थक कर दिया', कितना आश्चर्यजनक लगता है।भारत तब तक सुखी नहीं हो सकेगा जब तक वह स्त्रियों का सम्मान करना नहीं सीखेगा। हम लोग स्त्री जाति को नीच, अधम, महाहेय एवं अपवित्र कहते हैं, फलस्वरूप हम लोग पशु, दास और हीन हो गये हैं। कृतज्ञता के सद्गुण से परिपूर्ण संन्यासी अमेरिकन स्त्रियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहता है—सौ जन्मों तक जन्म लेकर उनकी सेवा करूँ तो भी उनके ऋण से उऋण नहीं हो सकता। इस बात को डंके की चोट पर पूरी दुनिया के सामने रखना कोई सहज बात नहीं है।जो मानव मात्र की सेवा नहीं, पूजा करने की बात सिर्फ़ कहता नहीं है, करने के लिए तत्पर रहता है। वह अपने गुरुभाइयों से आह्वान करता है—तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं को समेटकर समुद्र में डुबो दो और साक्षात् तैंतीस करोड़ नारायण की पूजा में लग जाओ।जो संन्यासी बड़ी मुश्किल से कठिन परिश्रम और अमेरिकन स्त्रियों की मदद से मठ का निर्माण करता है, महामारी फैलने पर मानवों की सेवा के लिए क्षण भर में उसे बेचकर सेवा करने को तत्पर हो जाता है। जिसके हृदय में शोषितों, वंचितों, ग़रीबों, दलितों, दीन जनों के लिए करुणा और प्रेम का संचार होता रहता है। जिनके दुख से दुखी होकर वह रोता है। वह देशवासियों को धिक्कारते हुए कहता है-भारत के लाखों अनाथों के लिए कौन रोता है? हे भगवान, क्या हम मनुष्य हैं? तुम लोगों के घरों के चारों तरफ़ जो पशुवत जी रहे, भंगी और डोम हैं, उनके लिए क्या कर रहे हो? उनके मुख में एक ग्रास देने के लिए क्या कर रहे हो ? बताओ ना। उन्हें छूते तक नहीं और दुदुरा करके भगा देते हो। क्या हम मनुष्य हैं? वे हज़ारों साधु ब्राह्मण भारत की दलित जनता के लिए क्या कर रहे हैं? मत छू, मत छू—बस यही रट लगाते हैं। अब धर्म है कहाँ?—भूमिका से

सुजातालेखन : सुजाता नाम से।शिक्षा : एम.ए. (द्वय) राजनीतिशास्त्र एवं इतिहास, एल.एल.बी., पीएच.डी., पत्रकारिता में डिप्लोमा। प्रकाशन : अनेक पत्र-पत्रिकाओं में लेख और कहानियाँ प्रकाशित। आकाशवाणी, भागलपुर से अनेक कहानियाँ प्रसारित।प्रकाशित रचनाएँ : उपन्यास : दिल का क्या रंग करूँ, कश्मीर : दर्द का सैलाब, क्या कहूँ जो अब तक नहीं कही, सौ साल पहले : चम्पारण का गांधी, मैं पृथा ही क्यों न रही, नीलांचल चन्द्र, नोआखाली : एक व्यक्ति की विजयी सेना, तेन त्यक्तेन, योद्धा संन्यासी; कहानी-संग्रह : वे नहीं हारे, प्रधानमन्त्री की चिट्ठी, आख़िरी फ़ैसला, अगले जनम मोहे बिटिया ही दीजियो, बात नहीं कहने की; गांधी- साहित्य : महात्मा का अध्यात्म, बापू और स्त्री, गांधी की नैतिकता, राष्ट्रपिता और नेताजी, राष्ट्रपिता और भगत सिंह, बापू कृत बालपोथी, चम्पारण का सत्याग्रह, सत्य के दस्तावेज़।अन्य रचनाएँ : संक्षिप्त श्रीमद्भागवतम्, श्री चौतन्यदेव।प्रकाशन के क्रम में : कहाँ है मेरा घर? (कविता-संग्रह); लाल फ्रॉकवाली माँ (कहानी-संग्रह); सरदार पटेल (जीवनी)।कार्यक्षेत्र : श्री रास बिहारी मिशन की मुख्य न्यासी, नेशनल मूवमेंट फ्रंट की संयोजिका। मिशन द्वारा प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्र के लिए विद्यालयों की स्थापना, जहाँ विशेषतया बालिका शिक्षा पर ज़ोर दिया जाता है। महिला स्वावलम्बन एवं सशक्तीकरण हेतु रोज़गार एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है। दलित बच्चों की शिक्षा हेतु विद्यालय-संचालन किया जाता है। वृन्दावन में निराश्रित महिलाओं के लिए आश्रम का संचालन किया जाता है। निराश्रित जनों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है। दो-तीन सीबीएसई चैरिटेबल विद्यालयों का संचालन किया जाता है। साथ ही, देश भर में बापू एकल पाठशाला का संचालन किया जा रहा है। जैविक खेती, देशी गायों का संरक्षण, विलुप्त बीजों का संरक्षण, 'नानी माँ रसोई' के नाम से मोटे अनाजों के आटे के प्रोमोशन की तैयारी भी की जा रही है।फ़िल्म-निर्माण : ‘बापू और स्त्री' डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म की निर्माता, लेखक और स्क्रिप्ट राइटर। सम्प्रति : प्रोड्यूसर, लेखिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता।

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