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Yog Aur Yogasan

by Swami Akshya Atmanand
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789383111886
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 200
  • Original Price: INR 500.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 327 grams
  • BISAC Subject(s): Yoga

महर्षि पतंजलि ने एक सूत्र दिया है- ' योगश्‍च‌ित्त: वृत्ति निरोध: ' । इस सूत्र का अर्थ है-' योग वह है, जो देह और चित्त की खींच-तान के बीच, मानव को अनेक जन्मों तक भी आत्मदर्शन से वंचित रहने से बचाता है । चित्तवृत्तियों का निरोध दमन से नहीं, उसे जानकर उत्पन्न ही न होने देना है । '' योग और योगासन ' पुस्तक में ' स्वास्थ्य ' की पूर्ण परिभाषा दी गई है । स्वास्थ्य की दासता से मुक्त होकर मानवमात्र को उसका ' स्वामी ' बनने के लिए राजमार्ग प्रदान किया गया है ।' स्वास्थ्य ' क्या है? ' स्वस्थ ' किसे कहते हैं?मृत्यु जिसे छीन ले, मृत्यु के बाद जो कुछ हमसे छूट जाए वह सब ' पर ' है, पराया है । मृत्यु भी जिसे न छीन पाए सिर्फ वही ' स्व ' है, अपना है । इस ' स्व ' में जो स्थित है वही ' स्वस्थ ' है ।कहावत है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा का वास होता है । यदि शरीर ही स्वस्थ नहीं होगा तो आत्मा का स्वस्थ रहना कहाँ संभव होगा । इस पुस्‍तक को पढ़कर निश्‍चय ही मन में ' जीवेम शरद: शतम् ' की भावना जाग्रत होती है ।प्रस्तुत पुस्तक उनके लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है जो दवाओं से तंग आ चुके हैं और स्वस्थ व सबल शरीर के साथ जीना चाहते हैं ।

स्वामी श्री अक्षय आत्मानन्द' योग-जगत् ' के एक अति श्रद्धास्पद अधिकारी गुरु के रूप में प्रख्यात नाम है- स्वामी श्री अक्षय आत्मानन्दजी का । स्वामीजी ने योगासन, प्राणायाम, अध्यात्म विज्ञान, सम्मोहन विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान आदि विषयों पर अत्यन्त सरल- सुबोध भाषा, तार्किक शैली में अति रोचक अनेक ग्रन्‍‍थों की रचना की है । स्वामीजी का साहित्य इतना सराहा गया है कि उनके ग्रंथों के कई-कई संस्करण हुए हैं ।स्वामी अक्षय आत्‍मानंद ‘योग’ को समर्पित एक ऐसे व्यक्‍त‌ि‍त्व हैं, जिनकी पुस्तकें याेग-प्रेमी बड़ी श्रद्धा से पढ़ते हैं। उनकी पुस्तकों ने जहाँ योग-विद्यि को सर्वसाधारण के लिए सहज-सुलभ बनाया है वहीं पाठकों को गहरी अंतर्दृष्‍ट‌ि भी प्रदान की है।स्वामीजी महाराज का जीवन नितान्त स्वच्छ, सरल तथा निश्छल है । स्वामीजी पाठकों की योग सम्बन्धी समस्याओं के समाधान पत्र द्वारा भी करते हैं ।

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