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Yun Hi Nahi Ban Jate Mahaveer "यूँ ही नहीं बन जाते महावीर" Book In Hindi - Dr. Vandna Dangi

by Dr. Vandna Dangi
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355216120
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 136
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 175 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

Yun Hi Nahi Ban Jate Mahaveer "यूँ ही नहीं बन जाते महावीर" Book In Hindi - Dr. Vandna Dangiआर निर्धारित लक्ष्य तक पहुँचने के प्रयोजन में जीवन का आनंद कहीं खो जाता है, तो कहीं जीवन की डोर तक टूटती दिखाई देती है। हम सोच में पड़ जाते हैं कि सब कुछ मिल जाने के बाद भी कुछ और पाने की चाह आखिर क्यों बनी रहती है?प्रस्तुत पुस्तक में लेखों और कविताओं के माध्यम से इन्हीं सब प्रश्नों के उत्तर तलाशने की कोशिश की गई है। ज्यादातर इन लेखों में जैन दर्शन के साथ-साथ वेदों, श्रीमद्भागवद्गीता और अन्य धर्म ग्रंथों में निहित श्लोकों या विचारधाराओं का भी उल्लेख किया है।जैन धर्म के प्रणेता महावीर स्वामी का जीवन अपने आप में एक मिसाल है कि किस प्रकार मानव से भगवान्‌ बनने का सफर तय किया जा सकता है। सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य जैसे सिद्धांतों की विश्व के लगभग हर धर्म में चर्चा की गई है, लेकिन जैन दर्शन में जितनी सूक्ष्मता से इनकी विवेचना की गई है, वह सभी धर्मों की मूल अवधारणा को बल ही प्रदान करती है। विभिन्‍न धर्मों में से समान या विरोधाभासी तत्त्वों को ढूँढकर अपनी विचारधारा के साथ समन्वित करने का जो दृष्टिकोण है, उसे ही ' अनेकांतवाद' कहा जाता है और इस पुस्तक में पाठकों को कुछ इसी प्रकार के दृष्टिकोण की झलक मिलेगी, ऐसा विश्वास है।

डॉ. बंदना डांगी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और लिबोर्ड फाइनेंस लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उन्होंने अर्थशास्त्र में बी.ए. (आनर्स) एवं एम.ए. तथा प्रबंध-शास्त्र में एम.बी.ए. एवं पी-एच.डी. की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय के जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज सहित अनेक प्रतिष्ठित प्रबंध संस्थानों में अध्यापन किया है। वह जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एस.एस. नाडकर्णी मेमोरियल रिसर्च मोनोग्राफ तथा बी. एस.ई. ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित प्राइमर ऑन कैपिटल मार्केट्स में सह-लेखिका रही हैं ।उनके द्वारा लिखित पाँच पुस्तकें “इंडियन इकोनॉमी की विश्व में बढ़ती पहचान', ' आर्थिक वातावरण : बदलते आयाम', वैश्विक युग का भारत : आर्थिक सुधार और समावेशी विकास का आधार', * भारतीय अर्थव्यवस्था : बदलते स्वरूप, एवं * कॉर्पोरेट गर्वनेंस : इमर्जिंग इश्यूज' भी प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने अपना ब्लॉग www.knowfunda.com लॉज्च किया है जहाँ वह घरेलू अर्थव्यवस्था एवं वैश्विक जगत्‌ से जुड़े समकालीन मसलों पर नियमित रूप से अपने आलेख प्रस्तुत करती हैं ।

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