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Swami Vivekananda Ke Success Siddhant

by Kunwar Kanak Singh Rao
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355213051
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 160
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): Health & Healing / Cancer

स्वामी विवेकानंद के सक्सेस सिद्धांत --* हम जो बोते हैं, वो काटते हैं। हम स्वयं अपने भाग्य के विधाता हैं। हवा बह रही है, वे जहाज, जिनके पाल खुले हैं, इससे टकराते हैं और अपनी दिशा में आगे बढ़ते हैं, पर जिनके पाल बँधे हैं, हवा को नहीं पकड़ पाते। क्या यह हवा की गलती है ?* हमारा कर्तव्य है कि हम हर किसी को उसका उच्चतम आदर्श जीवन जीने के संघर्ष में प्रोत्साहित करें और साथ-ही-साथ उस आदर्श को सत्य के जितना निकट हो सके, लाने का प्रयास करें।* जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान्‌ पर विश्वास नहीं कर सकते। भला हम भगवान्‌ को खोजने कहाँ जा सकते हैं, अगर उसे अपने हृदय और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते। ब्रह्मांड की सारी शक्तियाँ पहले से हमारी हैं | वो हमीं हैं, जो अपनी आँखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।* जब कोई विचार अनन्य रूप से मस्तिष्क पर अधिकार कर लेता है, तब वह वास्तविक, भौतिक या मानसिक अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सबकुछ भूल जाओ।स्वामी विवेकानंद अप्रतिम मेधा के धनी थे, जिन्होंने अल्पायु में ही मानव समाज को अपने ज्ञानकोष से समृद्ध किया। इस मंजूषा में प्रस्तुत हैं कुछ विचार-रत्न जो आपके सफल और सुखी भविष्य का पथ प्रशस्त करेंगे।

कुँवर कनक सिंह राव वर्तमान समय में शिक्षा क्षेत्र के शिरोमणि, योग्य, कर्मठ लेखक एवं शिक्षक कुँवर कनक सिंह राव का जन्म राजस्थान के कांठल, प्रतापगढ़ के पास ठिकाना 'ढलमू ' में हुआ था।मात्र 14 वर्ष की उम्र में ही वह 'कुँवर क्रांति' के नाम से साहित्य जगत्‌ में प्रसिद्ध हो गए और शीघ्र ही अखिल भारतीय कवि के रूप में ख्याति अर्जित की । राष्ट्रीय मंच पर उन्होंने वीर रस के कवि के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की और आशावादी काव्य पाठ कर पाठकों का मन हरते रहे।साहित्य क्षेत्र के साथ ही वे कालांतर में शैक्षणिक क्षेत्र में भी एक दैदीप्यमान नक्षत्र की भाँति अपनी चमक बिखेरते हुए उदित हुए और स्थापित हो गए। 1997 में बी.एड. करने के पश्चात्‌ वर्ष 1997-98 में रेलवे स्टेशन मास्टर परीक्षा में चयनित हुए। 1998 में राज्य पुलिस उप निरीक्षक परीक्षा उत्तीर्ण की तथा 1999 में ए.ई.सी.एस में। प्रारंभ में टी.जी.टी के रूप में तथा सन्‌ 2000 में इतिहास के प्राध्यापक के रूप में अध्यापन कार्य किया। राजस्थान के युवाओं के मध्य शीघ्र ही उन्होंने इतिहास के अध्यापक के रूप में एक अविस्मरणीय स्थान बनाया जो आज भी यथावत है। इ-मेल : kunwarkanak9@gmail.com

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